Thee Hoon Rahoongi - A Hindi Book by - Vartika Nanda - थी हूँ रहूँगी - वर्तिका नन्दा
Hindi / English

शब्द का अर्थ खोजें

पुस्तक विषय
नई पुस्तकें
कहानी संग्रह
कविता संग्रह
उपन्यास
नाटक-एकाँकी
लेख-निबंध
हास्य-व्यंग्य
व्यवहारिक मार्गदर्शिका
गजलें और शायरी
संस्मरण
बाल एवं युवा साहित्य
जीवनी/आत्मकथा
यात्रा वृत्तांत
भाषा एवं साहित्य
प्रवासी लेखक
संस्कृति
धर्म एवं दर्शन
नारी विमर्श
कला-संगीत
स्वास्थ्य-चिकित्सा
योग
बोलती पुस्तकें
इतिहास और राजनीति
खाना खजाना
कोश-संग्रह
अर्थशास्त्र
वास्तु एवं ज्योतिष
सिनेमा एवं मनोरंजन
विविध
पर्यावरण एवं विज्ञान
पत्र एवं पत्रकारिता
ई-पुस्तकें
अन्य भाषा

मूल्य रहित पुस्तकें
सुमन
पांच पापी
चन्द्रकान्ता
कृपया दायें चलिए
प्रेम पूर्णिमा

मार्च १८, २०१३
पुस्तकें भेजने का खर्च
पुस्तकें भेजने के सामान्य डाक खर्च की जानकारी
आगे
Thee Hoon Rahoongi

थी हूँ रहूँगी

<<खरीदें
वर्तिका नन्दा<<आपका कार्ट
मूल्य$ 15.95  
प्रकाशकराजकमल प्रकाशन
आईएसबीएन9788126722327
प्रकाशितजनवरी ०१, २०१२
पुस्तक क्रं:8659
मुखपृष्ठ:सजिल्द

सारांश:
Thee Hoon Rahoongi (Vartika Nanda)

ये हैं प्राइवेट टीवी चैनलों के शुरूआती दौर की एक विख्यात अपराध पत्रकार की लिखी कविताएँ। पहली नज़र में लगता है कि नम धरातल पर बैठकर गुनगुनी धूप सेंकते हुए बुनी गई हैं ये कविताएँ। वर्तिका नन्दा ने सालों अपराध पर काम किया, बलात्कार की रिपोर्टिंग पर शोध किया, इसलिए उनकी कविताओं को एक अलग लैंस से देखना लाज़मी हो जाता है। अपराध की कठोरता के बाद कविता के ताने-बाने में आने का प्रयास इसीलिए एक विरोधाभासी भाव भी पैदा करता है।

मरजानी अलग-अलग स्वरों की कविताओं का संगम है। कवयित्री के बचपन के झूले आतंकवाद की सुरंग से होकर गुज़रे हैं। यौवन से उम्मीदें होते हुए भी यहाँ उनकी क्षणभंगुरता पीछा करती दिखती है। खुद युवा होते हुए भी कवयित्री ने बुढ़ापे और साथ ही मृत्यु को लगातार अपने ज़ेहन में रखा है। कुछ कविताएँ मीडिया पर भी हैं, मीडिया की उस संवेदनहीनता पर चोट करती हुईं जो उसका हिस्सा बनने पर किसी को भी छू सकती है।

ये कविताएँ शाब्दिक संचय नहीं बल्कि सतत यात्रा का अहसास कराते हुए हमारे साथ-साथ चलती दिखती हैं।

एक और पहलू। कुछ कविताएँ यह अहसास भी साफ़ तौर पर कराती हैं कि यह आधुनिक महिला की कलम से निकली साधारण महिला की गाथा है। ऐसी कविताओं की मार्मिकता और दो-टूकपन अपने आपमें अनूठा है।


मुख्र्य पृष्ठ  

No reviews for this book..
Review Form
Your Name
Last Name
Email Address
Review
 

   

पुस्तक खोजें

चर्चित पुस्तकें


सोने का किला
    सत्यजित राय

कुरु कुरु स्वाहा
    मनोहर श्याम जोशी

अग्निव्यूह
    श्रीराम दूबे

अमली
    हृषीकेश सुलभ

तत सम
    राजी सेठ

लाल पसीना
    अभिमन्यु अनत

  आगे

समाचार और सूचनाऍ

मार्च १५, २०१२
हमारे संग्रह में ई पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। कुछ ई-पुस्तकें यहाँ देखें।
आगे...

Font :