Neta Jisko Koi Upadhi Nahin - A Hindi Book by - Robin Sharma - नेता जिसको कोई उपाधि नहीं - रॉबिन शर्मा
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Neta Jisko Koi Upadhi Nahin

नेता जिसको कोई उपाधि नहीं

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रॉबिन शर्मा<<आपका कार्ट
मूल्य$ 9.95  
प्रकाशकजयको बुक्स
आईएसबीएन978-81-8495-212
प्रकाशितजनवरी ०१, २०११
पुस्तक क्रं:8253
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Neta Jisko Koi Upadhi Nahi - A Hindi Book - by Robin Sharma

पंद्रह वर्षों से भी ज्यादा समय से, रॉबिन शर्मा फॉर्च्यून 500 कंपनियों के साथ ही विश्व के कई अमीर लोगों को सफल होने के सूत्रों के बारे में जानकारी देते आ रहे हैं। इसी की वजह से वह विश्व के सबसे ज्यादा मांग रखने वाले नेतृत्व सलाहकार बने हैं। अब, पहली बार, रॉबिन शर्मा अपनी मालिकाना प्रक्रिया को आपके सामने पेश करने जा रहे हैं, ताकि आज के इस अनिश्चितता भरे माहौल में आप बेहतर काम कर अपनी कंपनी को आगे बढ़ने और एक नई ऊंचाई पर पहुँचने में मदद कर सकें।

नेता जिसको कोई उपाधि नहीं से आप सीख पाएंगे :

* अपनी मौजूदा स्थिति की चिंता किए बिना किस तरह काम करें और एक सुपरस्टार की तरह लोगों को प्रभावित करें।

* तुरंत परिवर्तन का असली रहस्य।

* बदलते समय में मिलने वाले मौके को पहचान कर उन्हें किस तरह हासिल किया जाए।

* मानसिक रूप से सशक्त बनने के लिए योग्य रणनीति और अपने क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए शारीरिक रूप से सशक्त बनना।

* अपनी टीम तुरंत ही बनाने की अनोखी योजना पर अमल करते हुए टीम बना कर ग्राहकों से वाहवाही बटोरना।

* चिंता दूर करने के वास्तविक जीवन के नुस्खे, किसी से भी हार न मानने के रूप में मन को तैयार करना, अपनी अंदरुनी शक्ति को पहचानना और अपने जीवन का संतुलन बनाना।

अपने जीवन की नौजूदा स्थिति में और, अपने संस्थान में काम करते हुए क्या करके दिखा सकते हैं, इससे सबसे ज्यादा और इकलौती महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी नेतृत्व क्षमता को किस तरह दिखा सकते हैं। आप अपने कैरिअर या जीवन में, कहीं पर भी आप अपना सबसे बेहतरीन काम दिखाएं। यह किताब आपको सिखाएगी की किस तरह आप अपनी लड़खड़ाती क्षमता पर दांव लगा सकते हैं, इस प्रक्रिया के दौरान आपके जीवन के साथ ही-आपके इर्दगिर्द की दुनिया में भी बदलाव लाया जा सकता है।

रॉबिन शर्मा नेतृत्व विशेषज्ञ के रूप में विश्व की सबसे सम्मानित व्यक्ति है। उन्होंने अपना जीवन संगठनों को, किस तरह वह अपने कर्मचारियों को उपाधि के बिना नेतृत्व करते हुए काम करना सीखाने के साथ ही आज के चुनौतीपूर्ण बदल रहे समय में जीत हासिल करना सिखाने के लिए समर्पित किया है। उनके ग्राहकों में माइक्रोसॉफ्ट, जीई, फेडेक्स, आईबीएम, नाइके, नासा, येल यूनिवर्सिटी और द यंग प्रेसिडेंट्स एसोसिएशन का नाम शामिल हैं। रॉबिन शर्मा द्वारा लिखी किताबें जैसे द मॉन्क हू सोल्ड हिज़ फेरारी और द ग्रेटनेस गाइड विश्व की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबें हैं जिनकी सत्तर भाषाओं में लगभग करोड़ों प्रतियां बिक चुकी हैं। इन किताबों का कई रॉकस्टार, राजघराने और मशहूर सीईओ ने स्वागत किया है।

अध्याय 1

नेतृत्व और सफलता आपका जन्मसिद्ध अधिकार हैं


कोई भी अपनी जोखिम भरी कल्पनाओं से परे सफलता हासिल नहीं कर सकता, बशर्ते उसे पहले जोखिम भरी कल्पनाओं पर सोचना शुरु कर देना चाहिए।

–राल्फ चैरेल

कुछ हासिल करने की दृष्टि किसी और इंसान को देना ही इंसान की सबसे बड़ी भेंट हैं।

–आयन रैंड

हम में से हर एक प्रतिभावान व्यक्ति के रूप में ही पैदा हुआ हैं। दुख की बात यह है कि ज्यादातर लोग सामान्यता के बीच जीते हुए ही मर जाते हैं। मुझे आशा है कि यह बात आपको परेशान नहीं करेंगी क्योंकि हम और आप कम समय ही साथ रहेंगे और ऐसे में शुरुआत में ही मैं यह बात आपसे कह रहा हूं। लेकिन मुझे लगता है कि मैं आपसे ईमानदार रहूं। मैं आपसे यह बात भी बांटना चाहता हूं कि मैं भी एक बेहद साधारण इंसान था, लेकिन मैं भाग्यशाली था कि मुझे कुछ असाधारण रहस्य सीखने का मौका मिला जिससे मैं व्यवसाय में सफल हुआ और जीवन को भी अच्छी तरह जी पाया। एक अच्छी बात यह है कि मैं यहां आपके सामने वहीं सब प्रस्तुत करने के लिए उपस्थित हूं जो मैंने चकित करने वाले जोखिम से सीखा था। तो आप भी बेहतरीन तरीके से काम कर सकते हैं। और अच्छी तरह जीवन बीता सकते हैं। इसे आज से ही शुरु करते हैं।

यह जो मैं एक बेहद प्रभावशाली पाठ आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं उसे मैं बेहद सादे तरीके से, सावधानी से और पूरी सच्चाई, गंभीरता के साथ पेश कर रहा हूं। हमारा यह सफर पूरी तरह मजेदार, अंतःप्रेरित करने वाला और मनोरंजक होगा। जो सिद्धांत और औजार आपको इस किताब में से मिलने वाले हैं वह अपने आप ही आपको अपने कैरिअर में ऊंचा उड़ने, खुशियों की चरम सीमा पर पहुंचने, और आपमें से आपको सबसे बेहतरीन चीजों को बाहर लाकर पेश करने में मदद करेंगे। और इससे भी ऊपर, मैं आपसे वादा करता हूं कि, मैं बहुत इमानदार रहूंगा। पूरे आदर के साथ मैं आपका ऋणी हूं।

मेरा नाम ब्लैक डेविस हैं और मेरा जन्म मिलवाकु में हुआ, न्यूयार्क में ही मैंने अपने जीवन का ज्यादा से ज्यादा समय बिताया है। अपनी बेहतरीन बातचीत के दौरान अगर आप मुझसे पूछे कि मेरा पसंदीदा खेल और किताबें कौन सी हैं तो मेरा जवाब होगा, इस शहर से मैं बेहद प्यार करता हूं। यहां के रेस्तरां। यहां की तेज गति। यहां के लोग। और वह रास्ते पर मिलने वाले हॉटडॉग्ज-अविश्वसनीय। हां, मैं खाने से बेहद प्यार करता हूं–यह जीवन का सबसे बड़ा आनंद है। खैर, बिग एप्पल जैसी इस विश्व में दूसरी कोई जगह नहीं है। यहां से जाने की मैं कल्पना भी नहीं कर सकता और न ही मेरी कोई योजना है। यह स्थान छोड़ कर मैं कभी भी नहीं जा सकता।

मैं जिस जगह पर था और जिस जगह पर पहुंचा वहां तक की अविश्वसनीय यात्रा तक पहुंचने के बारे में बताने के पहले आप मुझे मेरे बारे में कुछ बाते बताने की इजाजत दें। बहुत ही संक्षिप्त में मैं इसे आपके सामने पेश करूंगा। मेरी मां इस दुनिया की सबसे दयालु मां थी। मेरे पिताजी बहुत ही निर्धारता वाले दृढ़ इंसान थे, ऐसा व्यक्ति मैंने आज तक नहीं देखा है। परिपूर्ण नहीं, लेकिन दाल में नमक जैसे वाले व्यक्ति। लेकिन मैंने पाया कि वह बहुत ही बेहतरीन इंसान थे। एक ऐसे इंसान जो, जो भी काम करेंगे पूरी तरह श्रेष्ठ करने की कोशिश करेंगे। और मेरे हिसाब से आप जो भी काम श्रेष्ठता के साथ करना चाहेंगे कर पाएंगे। और एक बार आपने वह काम कर दिया, आप घर जाकर आराम से चैन की नींट सो सकेंगे। जो अपने बस में नहीं है उसके बारे में चिंता करते रहने से इंसान बीमारी को आमंत्रित करता है। ज्यादातर हम उन चीजों पर ध्यान देते हैं या सोचते रहते हैं जो अपने बस में नहीं है या जो कभी हो ही नहीं सकती। इस बारे में कर्ट वोनेगट का बहुत ही अच्छा वक्तव्य है। उसने कहा है–‘‘आपके जीवन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि आपके मन में जो विचार आते हैं वह चिंतायुक्त मन में नहीं आते, बल्कि वह उस वक्त आते हैं जब आप किसी दिन, मंगलवार की शाम को 4 बजे आराम से बैठे हैं और वह आपके मन में आ जाते हैं और आपकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता हैं।’’

मेरे माता-पिता ने मुझे कई तरीके से अच्छी तरह पाला-पोसा है। उनके पास ज्यादा कुछ नहीं था, लेकिन एक तरह से उनके पास सबकुछ था : अपनी गलतियों को स्वीकार करने का साहस उनमें था, उनके विचार अमूल्य थे, और वह आत्मसम्मानी थे। उन दोनों को मैं बहुत याद करता हूं, ऐसा एक भी दिन नहीं होता, जिस दिन मैं उन्हें याद नहीं करता। मेरे कायराना पलों में, मैं उस बात को महसूस करता हूं कि हम लोगों को बेहद साधारण रूप से लेते हैं जो हमसे बेहद प्यार करते हैं। जब तक हम उन्हें खो देते हैं तो हम गम में डूब जाते हैं और उस वक्त प्रार्थना करते हैं कि अगर दूसरा मौका मिला तो वह जिस बात के हकदार हैं उन्हें वह हक देकर रहेंगे। कृपा करके अपने जीवन को पश्चाताप में जलने न दें। यह हम सभी के साथ हुआ है और होता आया है। अगर आज भी आप अपने माता-पिता के साथ है तो आप बेहद भाग्यशाली हैं और उनका आदर, सम्मान करना शुरू करें। इसकी शुरुआत आज से ही करें।

जब मैं बड़ा हो रहा था, मैं एक अच्छा लड़का था। मेरे दादाजी मेरे बारे में कहते थे कि दो पैरों पर चलने वाला यह एक दिल है। मैंने अपने जीवन में नियम बनाया था कि न तो मैं किसी का दिल दुखाऊंगा और न ही किसी बात का भंग करूंगा। स्कूल मे मैं पढ़ाई में ठीकठाक था, लड़कियों में मैं अच्छा खासा लोकप्रिय था और मैंने स्कूल की टीम की ओर से फुटबॉल मैच भी खेले थे, मैं एक अच्छा फुटबॉल खिलाड़ी था। यह सब उस समय बदल गया जब मेरे माता-पिता मारे गए। मेरे पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई थी। मैं अपना आत्मविश्वास खो चुका था और मेरी नजर के सामने कोई भी उद्देश्य नहीं था। मेरी जिंदगी जैसे रुक सी गई थी।

20 वर्ष की उम्र के आसपास, मैं एक नौकरी छोड़ कर दूसरी नौकरी पकड़ने की प्रवृत्ति वाला युवा बन गया था, एक तरह से विमान में जिस तरह आटोपाइलट पर निर्भर रहा जाता है, बिलकुल उसी तरह कुछ देर निर्भर रहने जैसा ही मेरा जीवन था। मैं सुन्न हो गया था और किसी भी बात पर गंभीरता से नहीं सोच रहा था। मैंने खुद को ज्यादा से ज्यादा टीवी देखने, ज्यादा खाना खाने और ज्यादा से ज्यादा चिंता करने में मन को लगा दिया था। जो मैंने खो दिया था उसे भुलने के लिए और उसका दर्द कम करने के लिए मैं यह सब कर रहा था।

जीवन के उस दौर में नौकरी मेरे लिए सिर्फ बिल चुकाने का एक जरिया था। मैं कैरिअर के बारे में सोच ही नहीं रहा था, सिर्फ दिन गुजारने की कोशिश कर रहा था। नौकरी मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण मायने नहीं रखती थी और न ही मैं उसे कुछ कर गुजरने की एक उपलब्धी के रूप में मैं देख रहा था। मैं तो उसे अपना समय व्यतीत करने के रूप में देख रहा था। नौकरी मेरे लिए सिर्फ एक टाइम पास का जरिया थी, मैं लोगों पर अपनी छाप दिखाने, कंपनी को बेहतर संस्था बनाने और बेहतर काम करते हुए अच्छी दुनिया बसाने और खुद का विकास करने के रूप में देख नहीं पा रहा था, मैं तो वक्त गुजारने के एक जरिए के रूप में ही नौकरी को देख रहा था।

आखिर में मैंने तय किया कि अब फौज में जाना चाहिए। मेरे हिसाब से मेरा यह एक अच्छा फैसला था जो मुझे एक सुरक्षितता देगा और मौजूदा झंझट से छुटकारा दिलाएगा। इराक में चल रहे युद्ध पर मुझे भेजा गया। फौज में होने की वजह से वहां के अनुशासन ने मेरे जीवन को एक आकार दिया, आज जो मैं हूं वहां तक पहुंचने के लिए मुझे इस अनुभव ने काफी मदद की। शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान मैंने देखा कि किस तरह मेरे दोस्त लड़ाई में शत्रु की गोलियों की शिकार होते हुए खून से लथपथ युद्धभूमी पर गिरे। मैंने देखा था कि कुछ जो अभी युवा भी नहीं हुए थे, को कितनी बर्बरता से अपाहिज कर दिया गया था और बुरी तरह घायल भी किया गया था। एक समय में मेरे में जो सौम्य उत्साह था वह भी जीवन की इस भयंकर निराशाजनक स्थिति से निकल गया और मैं सोचने लगा कि मेरे जीवन में क्या होगा और मैं कहां जाऊंगा, हालांकि युद्ध में मैं शारीरिक सदमे से आहत होने से बच गया था, बावजूद इसके मैं मैं घायल फौजी बन गया था। मैं जहां पर भी जाता मेरे साथ इन यादों का भूत साथ रहता।

एक दिन, अचानक ही मेरे घर वापस जाने का समय आ गया। यह इतने अचानक हो गया कि मैं भौचक्का रह गया। मुझे यातायात के विमान में बिठाया गया और मैं घर की ओर उड़ने लगा। नित्यचर्या के मुताबिक मेरी मेडिकल जांच करने के बाद एक दो दिन में ही मेरे हाथों में मेरे दस्तावेज रखे गए। देश के लिए अपनी सेवा देने के लिए मेरा धन्यवाद अदा किया गया और मुझे मेरे आगे के जीवन के लिए शुभकामनाएं दी गई। शरद ऋतु की एक धूपभरी दोपहर में जब मैं शहरों की गलियों में घूमने लगा तो एक निष्कर्ष पर मैं आ गया, और वह था–मैं फिर से अकेला हो गया हूं।

मैंने उस सोसाइटी में फिर से जाने के प्रयास शुरु किए जो मुझे भूल चुकी थी। ज्यादातर रातों में, मैं सो नहीं पाता था–मेरा मन मुझे उन युद्ध के दौरान देखी हिंसात्मक घटनाओं के दुस्वप्नों की याद दिलाते हुए दंडित कर रहा था। मैं बिस्तर पर घंटों तक पड़ा रहता था और बिस्तर से उठ कर दिन की शुरुआत करने के लिए ताकत जुटाने की कोशिश करता रहता। मेरा शरीर घायल हो चुका था और मैं सिर्फ उन्हीं लोगों को याद करता था जो युद्ध के दौरान मेरे साथ थे और मैं डरता था। हालांकि डर का कारण मेरी समझ में नहीं आ रहा था। जो चीजें पहले करने में मुझे मजा आता था वह अब मुझे ऊबाऊ और तुच्छ लग रही थी। मेरे जीवन में कोई भी उद्देश्य नहीं बचा था, कभी कभी तो मुझे लगता था कि आत्महत्या कर लेनी चाहिए।

शायद मेरे माता-पिता द्वारा मुझे जो एक अच्छी सीख दी थी, सीखने से प्यार करने की, खास कर किताबों से। एक किताब के सिर्फ आवरण पर से भी मिलने वाली आईडिया पर अमल किया जाए तो भी जीवन को नए सिरे से बनाने की ताकत मिल जाती हैं। कुछ चीजें इतनी बेहतर होती है कि वह जिसमें निवेश करने से इंसान एक बेहतर विचारक बन सकता है और अपने दिमाग को भी सशक्त बना सकता है। खुले और सशक्त इंसान की विशेषता यह है कि वह हमेशा नई बातें सीखने के लिए तैयार रहता है, कभी भी नई बातें सीखने में पीछे नहीं रहता। संकटभरे समय से उबरने के लिए खुद को प्रशिक्षित करते रहना और जीने के तरीकों पर अमल करते रहना बेहद जरूरी है। जो श्रेष्ठ इंसान हैं उनके पास भव्य लाइब्रेरी अवश्य नजर आएगी।

इसलिए मैंने सोहो के नीचली ओर के एक बुकस्टोर में काम करना शुरु किया। मेरे नकारात्मक विचार और निहायती आत्मसंतुष्ट रवैये की वजह से मैं स्टोर में अच्छा काम नहीं कर पा रहा था। मुझे मेरे मैनेजर की ओर से हमेशा डांट पड़ती, और मैं पूरी तरह उसकी उपेक्षा रखता था। मेरे सामने कोई दिशा नहीं थी, एक टीम के सदस्य के रूप में भी नहीं, मैं साधारण स्तर से भी नीचले स्तर का काम कर रहा था। सिर्फ किताबों के प्रति मेरे प्यार की वजह से ही मैं बच गया था। किताब की दुकान चलाने वाले मेरे साधारण काम के तरीके की वजह से मेरा तिरस्कार करते थे लेकिन स्टोर में आने वाले लोग मुझे पसंद करते थे। और इसी तरह मेरा काम चलता रहा। एक धागे की तरह।

और अब यहां पर कहानी में एक सुखद बदलाव नजर आया। एक दिन, मेरे जीवन में जैसे जादुई चमत्कार हो गया। जब मैं ज्यादा की अपेक्षा नहीं रख रहा था उस समय मेरे साथ अच्छी घटना घटी। अच्छा समय मुझे ढूंढ़ते हुए आया। और उसने पूरा खेल बदल दिया। एक बेहद जिज्ञासु अपरिचित व्यक्ति मुझसे बुकस्टोर में मिलने आया। और उसने बहुत ही कम समय में मेरी मर्यादाओं को समझते हुए, जिससे मैं पूरी तरह चिपका हुआ था, मुझे जो पाठ पढ़ाए–उसने मेरे सामने एक नई दुनिया ही रख दी और मुझमें भी एक नया बदलाव आ गया।

आज, 29 वीं उम्र में-मैं बेहद सफल हूं और जीवन का हर सुख देख रहा हूं जिसका मैंने सपना भी नहीं देखा था। अब मेरी समझ में आया है कि कठिन समय लोगों को बेहतर बनाता है। समस्याओं के बीच में ही संधी रहती है। और हम में से हर कोई जीतने के लिए ही आया हुआ है–काम और जिंदगी दोनों में। अब वह समय आ गया है जब मैं आपके साथ यह बातें शेअर करूं जिसने मेरे जीवन को बदल दिया।
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