Mahanta Ka Margdarshak - A Hindi Book by - Robin Sharma - महानता का मार्गदर्शक - रॉबिन शर्मा
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Mahanta Ka Margdarshak

महानता का मार्गदर्शक

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रॉबिन शर्मा<<आपका कार्ट
मूल्य$ 11.95  
प्रकाशकजयको बुक्स
आईएसबीएन9788184951134
प्रकाशितजनवरी ०१, २०१०
पुस्तक क्रं:7844
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Mahanta Ka Margdarshak - A Hindi Book - by Robin Sharma

महानता का मार्गदर्शक एक ऐसी शक्तिशाली और यथार्थ किताब है जो आपको निजी और व्यावसायिक स्तर पर विश्वस्तरीय महानता हासिल करने में मदद करती है। रॉबिन शर्मा ने इसे लिखा है, जो विश्व के चोटी के सफलता के गुरु के रूप में जाने जाते हैं और उन्होंने कई श्रेष्ठ सीईओ, उद्योगपतियों, रॉक स्टार, राजे महाराजे, फॉर्च्यून 500 कंपनियों को अपने विचारों से श्रेष्ठ बनाने का काम किया है। महानता का मार्गदर्शक आपको एक ऐसा सिद्ध हुआ सिद्धांत पेश कर रहा है जिसकी मदद से आप अपनी प्रतिभाओं को पहचान कर असाधारण जीवन जी सकते हैं। खुद ही जान लीजिए।

*सफल लोगों के निजी आचरण
*संगठन को महान बनाने के लिए कारगर विचार
*समस्याओं में से संधी ढूंढ़ने के क्रांतिकारी उपाय
*अपने प्रदर्शन का स्तर बढ़ाने के लिए क्रांतिकारी रणनीति
*असली संपत्ति को हासिल करते हुए असली खुशियां भी कैसे पाएं
*शारीरिक ऊर्जा का सही इस्तेमाल करने के क्रांतिकारी विचार
*निजी जीवन और काम में बेहतर संतुलन बनने के विचार और जीवन को मजे से जीने के नुस्खें

‘महानता का मार्गदर्शक’ के पन्नों में ‘गांधीजी के साथ मैंने कॉफी पी’, ‘सुपरस्टार की तरह बातें करें’, ‘प्रथम श्रेणी में आने का प्रयास करें’, ‘समस्या ही बुद्धिमानी को जन्म देती है’ और ‘जिसने ज्यादा अनुभव लिया वही जीतता है’ आदि प्रकरणो से आप पाएंगे ऐसे अनोखे विचार जो आपको बेहतर और श्रेष्ठ काम करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

1
मैं गुरु नहीं हूं


कभी कभी मीडिया मुझे नेतृत्व करने वाले (या स्व–सहायता) ‘‘गुरु’’ के रूप में पुकारता है, लेकिन मैं गुरु नहीं हूं। मैं एक साधारण सा इंसान हूं जिसने विद्वानों से उन विचार और औजारों की जानकारी प्राप्त की है। जिनकी मदद से मैंने कई लोगों का जीवन सुधारने के साथ ही कई संगठनों को विश्व स्तर का बनाने में मदद की है।

लेकिन मैं आपसे यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि वास्तव में मैं आप से अलग नहीं हूं। मेरा अपना संघर्ष है, मेरी हताश है और मेरा डर—साथ ही मेरी आशा, लक्ष्य और सपने भी हैं। मेरे पास कुछ अच्छे पल भी हैं और दुखद प्रसंग भी। (मैंने कुछ बेहद खराब गलतियां की हैं और कई अच्छे निर्णय भी लिए हैं।) मैं एक ऐसा इंसान हूं जो हमेशा प्रयासरत रहा हूं। मेरे पास जो विचार हैं जिसे आप उपयुक्त मानते हैं, कृपया उसे अच्छी तरह जान लें क्योंकि उसके लिए मैंने अपने जीवन के कई दिन, उसकी जानकारी इकट्ठा करने के लिए बिताएं हैं। सोच विचार और व्यावहारिक तौर-तरीके के बारे में आपकी मदद करने के लिए और एक इंसान का जीवनरूपी खेल खेल कर चोटी पर पहुंचने के लिए मैं प्रयासरत हूं। कंपनियों को असाधारण स्थान पर पहुंचाने के लिए क्या किया जा सकता है इस बारे में मैं सोचता रहता हूं। लंबे समय तक कार्य करने पर आपको उसकी अंतदृष्टि और समझ की गहराई पता चलती है। उसके बाद ही आपको गुरू कहा जा सकेगा।

भारत के बेंगलोर शहर के एक बुक स्टोर में हस्ताक्षर देते वक्त एक व्यक्ति ने मुझसे सुना कि ‘‘मैं गुरु नहीं हूं।’’ वह मेरे पास आया और उसने मुझसे कहा, आप खुद को गुरू कहलवाने में इतना असहज क्यों महसूस करते हैं। ‘गु’ का संस्कृत में सीधा मतलब होता है ‘अंधेरा’ और ‘रू’ का सीधा मतलब है दूर करता है और ऊजाले का महत्व समझाता हैं।’’ उनका मुद्दा बेहद उचित था जिसने मुझे सोचने पर मजबूर किया।

मेरे पास कुछ अच्छे पल भी हैं और दुखद प्रसंग भी। मैंने कुछ बेहद खराब गलतियां की हैं और कई अच्छे निर्णय भी लिए हैं। मैं एक ऐसा इंसान हूं जो हमेशा प्रयासरत रहा हूं।

अगर आप सोचते हैं कि मैं आपसे अलग हूं, तो आप यह कहिए कि रॉबिन जिस तरह की बातें कर सकता है उस तरह की बातें मैं नहीं कर सकता ‘‘क्योंकि रॉबिन में जो प्रतिभा और काबिलियत है वह मुझमें नहीं है। वह जो कहता है वह उसके लिए बेहद आसान है इसलिए वह गुरु हैं।’’ नहीं। बड़े खेद के साथ मुझे कहना पड़ रहा है कि मैं भी आपके जैसा ही मेनहत करने वाला आम इंसान हूं जो दो बेहद खूबसूरत बच्चों का पिता है और उसे अकेला ही संभाल रहा है और जो सोचता है कि लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता हैं। यहां कोई गुरू नहीं है। लेकिन मुझे ‘‘अंधेरा दूर करने वाला’’ मुद्दा बेहद पसंद आया। उसके बारे में मैं और जानना चाहता हूं। शायद कोई गुरू इसमें मेरी मदद करें।

2
हार्वे केइटल और आशाओं की खिड़कियां


मैं हमेशा सही नहीं हो सकता (मैंने पहले ही कहा है कि मैं कोई गुरू नहीं हूं) लेकिन मुझे पता है कि मैं इतनी कोशिश, इतनी मेहनत अवश्य करता हूं कि मेरे आचार मेरे विचारों से मेल खाएं। फिर भी मैं एक इंसान हूं और इसका सीधा मतलब है मैं भी कभी-कभी गलत हो सकता हूं। (मैं आज तक किसी परिपूर्ण इंसान से नहीं मिल पाया हूं)। मेरे कहने का क्या मतलब है यह मैं यहां बता रहा हूं।

व्यक्तिगत और संगठनात्मक नेतृत्व पर मेरी कार्यशालाओं में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों और मेरे पाठकों को प्रोत्साहित करने के लिए मैं बहुत समय व्यतीत करता हूँ। उनके डर को दूर भगाने की मैं कोशिश करता हूं। और उनके डर को निकालकर उस अससर को प्राप्त करने में मदद करता हूं जो बहुत छोटा ही अवसर होता है। अंग्रेजी में इसे ‘क्यूबिक सेंटीमीटर ऑफ चांस’’ कहा जाता है। मैं अपने ग्राहकों को सपना देखने, चुनौतियां स्वीकार करने और चमकते रहने के लिए उत्साहित करता हूँ क्योंकि मेरा मानना है कि अच्छा जीवन जीने के लिए अच्छा प्रदर्शन देकर ऊंचाई पर पहुंचना जरूरी होता है। मेरे हिसाब से जो ज्यादा अनुभव लेता है वही हमेशा जीत हासिल करता है। जिन स्थानों से मुझे डर लगता था या जो चीजें करने में मुझे असुविधा होती थी वह मैं नहीं करता था क्योंकि मैं खुद को पोस्टर बॉय मानता था। लेकिन माफ करें, मैं अब खुद को वैसा नहीं मानता।

टोरंटो शहर के फोर सीजन होटल की लॉबी में मैं एडवांस मेडिकल ऑप्टिक्स नाम की एक कंपनी के लिए भाषण देने के लिए तैयार हो रहा था। यह कंपनी लंबे समय से हमारी ग्राहक हैं जो एक प्रभावशाली संगठन भी हैं। मैंने सहज ही ऊपर देखा और मैंने किसे देखा ? हार्वे केइटल को। हां यह वहीं हार्वे केइटल थे फिल्म ‘‘रिजरवियर डॉग्स’’ से मशहूर हुए फिल्म अभिनेता। और मैं क्या एक ऐसा आम आदमी जिसने केवल एक उपन्यास’’ एक सन्यासी जिसने अपनी संपत्ती बेच दी’’ लिखा था। उनकी महानता के सामने मैं सिकुड़ता जा रहा था।

हर दिन जीवन में आशाओं की एक नई खिड़की खोल देता है। यह आप पर निर्भर होता है कि आप उसे किस तरह लेते हैं और उस पर ही आपका भविष्य निर्भर होता है।

मैं नहीं जानता कि मैं खड़ा क्यों नहीं हुआ और क्यों उनके पास जाकर दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाया। शायद यह मेरा दोष ही होगा क्योंकि इसके पहले भी कई बार इस तरह के मौके मैंने गंवाए हैं। बेसबॉल के महान खिलाड़ी मशहूर पीट रोज के साथ शिकागर एअरपोर्ट पर मैंने इसी तरह का बर्ताव किया था। (फीनिक्स जाते हुए हम दोनों अगल-बगल की सीट पर ही बैठे थे।) पिछले गर्मियों के मौसम में रोम के एक होटल की लॉबी में हेनरी केविस के साथ भी ऐसा ही हुआ। हेनरी इस विश्व के सबसे बड़े फायनांसर है। (मेरे साथ उस समय मेरा 11 वर्षीय बेटा कोल्बी था जो खुद को बहुत ही शांत समझता है)। सिनेटर एडवर्ड केनेडी के साथ भी बोस्टन में भी मेरा बर्ताव ऐसा ही रहा। इतना ही नहीं मशहूर गिटारिस्ट वर्तुसो एडी वैन हेलेन के साथ भी मेरा यही रवैया था जब मैं नोवा स्कोटिया के हालीफैक्स में पल-बढ़ रहा था और अब हार्वे काइटल के साथ दोस्ती करने का मैका भी मैंने गंवाया।

हर दिन जीवन में आशाओं की एक नई खिड़की खोल देता है। यह आप पर निर्भर होता है कि आप उसे किस तरह लेते हैं और उस पर ही आपका भविष्य निर्भर होता है। आप उससे सिकुड़ते हैं और आपका जीवन छोटा हो जाता है। डर को महसूस करो और उसे भगाओ ताकि आपका जीवन बड़ा हो। जीने के लिए जीवन बहुत छोटा है। आपके अपने बच्चों का जीवन संवारने और उनका भविष्य बनाने के साथ ही उनके प्रति प्यार जताने के लिए भी आपके पास एक छोटी सी खिड़की की ही हैं। जब यह खिड़की बंद हो जाती है तो इसे दुबारा खोलना बेहद कठिन होता है।

अगर फिर से हार्वे काइटल से मेरी मुलाकात होती हैं तो मैं वादा करता हूं कि उनके पास दौड़ कर जाऊंगा। जब तक हम बातचीत शुरू नहीं करेंगे तब तक वह शायद यही सोचेंगे कि मैं एक मशहूर दार्शनिक हूं। जब वह बातचीत करेंगे तब उन्हें सच्चाई का पता चलेगा कि मैं एक बहुत ही सीधा सादा आदमी हूं जिसने जिंदगी द्वारा दिए गए तोहफों को अख्तियार कर लिया हैं।
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