Kanyapaksha - A Hindi Book by - Vimal Mitra - कन्यापक्ष - विमल मित्र
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Kanyapaksha

कन्यापक्ष

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मूल्य$ 4.95  
प्रकाशकभारतीय साहित्य संग्रह
आईएसबीएन0
प्रकाशितजनवरी ०१, २००९
पुस्तक क्रं:7615
मुखपृष्ठ:-

सारांश:
Kanyapaksha

प्रस्तुत है पुस्तक के कुछ अंश

सोना दीदी कहती थीःउर्वशी की तरह किसी नारी का चित्रण कर जो किसी की माँ नहीं, बेटी नहीं, पत्नी नहीं-लेकिन सब कुछ है। ‘विक्रमोर्वशीय’ पढ़ा है न ?
लगता था, सोना दीदी मानो अपने ही बारे में कह रही हों। लेकिन मैंने जिनको देखा था, वे सब तो साधारण लड़कियाँ थीं। मुझे बड़ा घमंड था कि मैंने अनेक विचित्र नारी-चरित्र देखे हैं। लेकिन सोना दीदी की बातों से लगा कि जो सचमुच उर्वशी को देख सका है, उसके लिए तो अन्य नारियाँ तुच्छ हैं।
विमल बाबू ने अपने प्रारम्भिक जीवन में देखे ऐसे ही कुछ उर्वशी-चरित्रों का चित्रण ’कन्या पक्ष’ में किया है।
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