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प्रकाशकडायमंड पॉकेट बुक्स
आईएसबीएन81-7182-684-9
प्रकाशितजनवरी ०१, २००९
पुस्तक क्रं:7572
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Home Hint’s - A Hindi Book - by Rajesh Sharma

सफलतापूर्वक वजन घटाने के लिए आवश्यक है संपूर्ण संतुलित भोजन और सही व्यायाम। यहां पेश हैं कुछ सुझाव जिन्हें अपनाकर आप चुस्त-दुरुस्त रह सकती हैं–

• अपने घर पर और कार्यालय में भोजन करने की जगह तय कर लें। खाना खड़े-खड़े या घूमते हुए नहीं, बल्कि आराम से बैठ कर खाएं। अपनी तय की हुई जगह के अलावा और कहीं भोजन न करें।

• खाना तभी खायें जब भूख लगी हो। यूं ही मुँह चलाने या स्वाद के लिए आहार न लें। अपने रेफ्रिजरेटर में फल-सब्जियां जैसे स्वास्थ्यकर आहार रखें।

• अपने भोजन की डायरी बना लें। खाने से पहले खाई जाने वाली वस्तु उसमें दर्ज कर लें। अपने अनुभव लिखें कि वजन घटते हुए आपको कैसा लग रहा है।

• भोजन के रूप में सूप संपूर्ण आहार भी हो सकता है। यह स्वास्थ्यकर, पोषक और स्वादिष्ट होता है।

• भोजनालय जाने से पहले ही तय कर लें कि आपको क्या खाना है। उसके अलावा और कुछ न खाएं।

• घर या बाहर भोजन अथवा नाश्ते के लिए एक दिनचर्या तय कर लें और तयशुदा समय पर खाएं।

• बाहर खाना खाने के चक्कर में घर पर भूखे मत रहिये। भूखे रहने या देर से खाने या एक वक्त भोजन न करने से शरीर की उपापचय क्रियायें धीमी हो जाती हैं और चर्बी जमने लगती हैं।

• धीमी-धीमी भोजन का आनंद लेते हुए खाएं।

• भोजन में कैलोरी की मात्रा में एकाएक कमी न करें। कैलोरी की कम ज़्यादा मात्रा वाला भोजन बदल-बदल कर खाएं। जब शरीर घटती कैलोरी का आदी हो जाता है तो वजन गिरना बंद हो जाता है।

• सुबह का नाश्ता जरूर करें। रात में शरीर के उपापचय गति मंद पड़ जाने के कारण उसे बढ़ाने के लिए सुबह नाश्ते की जरूरत होती है। अगर आप नाश्ता न कर सीधे दोपहर का भोजन करती हैं तो धीमी उपापचय गति के कारण कैलोरी दहन धीमे होता है। सुनने में अटपटा जरूर लगता है परन्तु वजन घटाने के लिए समय पर पौष्टिक भोजन अत्यंत आवश्यक है। नाश्ते और दोपहर के भोजन के बीच 5 घंटे से अधिक समय होने पर व्यक्ति भोजन की अधिक मात्रा लेता है सो अगर भूख लगे और 5 घंटे से ऊपर हो गया हो तो कुछ हल्का-फुल्का खा लेना चाहिए।

बरसात में खान-पान


वर्षा ऋतु में खान-पान, रहन-सहन आदि पर ध्यान न दिया जाय तो अस्वस्थ होने की आशंका रहती है।
वर्षा के मौसम में अपनी पाचन शक्ति और पाचन संस्थान का पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए, ताकि बात का प्रकोप ज्यादा न हो।

• आहार में बासी, कच्चे और अन्य वातकारक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

• जल को उबालकर ठन्डा करके पियें।

• बरसात में अधिक आलू का सेवन ठीक नहीं है। आलू स्टार्चयुक्त पदार्थ होने से गर्मी बढ़ाता है। पत्तियों वाली हरी शाक-सब्जी, इस मौसम में नहीं खानी चाहिए। कहा गया है कि ‘सावन साग न भादौ दही।’ बरसात के दिनों में शाक के सेवन से पेट में वायु बढ़ती है।

• खीरा अगर सुबह खाया जाए तो अमृत है। खीरा पित्त नाशक है और तेल, खटाई, मिर्च की गरमी को शांत करता है। खीरा सलाद में भी खाना चाहिए।

• मक्खियों से बचने के लिए सभी चीजों को ढककर रखना चाहिए और बाजार की खुली हुई चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिए।

• ओढ़ने-बिछाने के कपड़ों को जब भी धूप निकले, धूप दिखायें।

• बरसात में नींबू का सेवन लाभदायक रहता है। इससे अपच, दस्त जैसी बरसाती बीमारियों से बचाव होता है।

• इस मौसम में चाय तुलसी की पत्तियां डालकर पीनी चाहिए।

• बरसात में नंगे पैर कभी नहीं घूमना चाहिए।

• सीलन युक्त कपड़े भी नहीं पहनना चाहिए।

• वर्षा ऋतु में दिन में सोना अहितकर है तथा जमीन पर नहीं सोना चाहिए।

• घर की सफाई के अतिरिक्त बीच-बीच में धूप, गुग्गल, गंधक आदि का धुआं करके हवा को शुद्ध करते रहना चाहिए।

• मच्छरों से बचने के उपाय करने चाहिए।
 
• इस ऋतु में हमारा घर और घर के आसपास का वातावरण साफ-सुथरा होना चाहिए।

गर्मी के मौसम में आपका खान-पान


• पानी अधिकाधिक पीएं। जहां तक संभव हो सके हैण्डपंप के पानी का ही प्रयोग करें, अन्यथा पानी उबालकर और छानकर ही पीएं।

• भोजन में गरिष्ठ खाद्य पदार्थों का प्रयोग न करें। हल्के-मिर्च-मसाले ही प्रयोग करें।

• भूख से थोड़ा कम खायें। इससे कब्ज की शिकायत नहीं होने पाती है।
 
• खाद्य पदार्थों को हमेशा ढककर रखें। बासी व खुले भोजन का उपयोग न करें।

• भोजन खूब चबा-चबाकर खायें, इससे वह आसानी से हजम होता है। मिठाई का प्रयोग कम ही करें। रात को मिठाई खाने या दूध पीने के बाद मंजन अवश्य करें अन्यथा दांत में कीड़ा लग सकता है।

• खाने में सफाई का विशेष ध्यान रखें। गर्मी के मौसम में ताजा भोजन ही करें।

कैसे रहें हरदम तरोताजा


गर्मियों की वह बेहद गरम शाम थी, आकाश में यहां-वहां बादल उमड़ रहे थे पर हवा न चलने के कारण शाम की उस पार्टी में सभी पसीना पोंछ रहे ते। इतने बडे हाल में 2 एयरकंडीशनर भी ऊंट के मुंह में जीरा लग रहे थे। तभी हल्के वस्त्रों में ताजगी व खुशबू बिखेरती रमील ने प्रवेश किया तो बरबस सबकी निगाहें उधर ही उठ चलीं। वह एकदम तरोताजा लग रही थी। गरमी का अहसास उसे न था और देर रात तक वह ऐसी है ताजगी से लबरेज रही।

दरअसल, हर मौसम में ही तरोताजा रहना भला लगता है। कुछ महिलाएं अपने व्यक्तित्व का यों निखार कर सकती हैं कि आते-जाते मौसम का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। आखिर चेहरे की ताजगी क्योंकर गायब हो जाती है ? दरअसल, उमस भरे गरम मौसम में तैल ग्रंथियां बहुत सक्रिय हो जाती हैं जिस के परिणामस्वरूप त्वचा अत्यधिक तैलीय हो जाती है जोकि कुछ देर बाद ही बासी सी लगने लगती है, ताजगी उड़नछू हो जाती है। अतएव निम्न सुझाव आप को तरोताजा रखने में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं–

• नियमित रूप से स्नान करें, मौसम कोई भी हो, स्नान अवश्य करें। इससे शरीर में ताजगी आती है। नहाते समय पानी में यूडीकोलोन की कुछ बूंदे अवश्य डाल लें। इस से स्फूर्ति बनी रहेगी। यदि यूडीकोलीन न हो तो ताजे संतरे के छिलकों को पानी में डाल लें। इससे पानी सुगंधित हो जाएगा और इसका अहसास अगले स्नान तक बना रहेगा।

• चेहरे पर समरकेयर मॉयश्चराइजर का ही प्रयोग करें। इससे पूर्व अच्छे किस्म का एस्ट्रिजेंट रुई से लेकर चेहरे पर लगा लें। इससे चेहरे पर पसीना बहुत कम आएगा। इसके अलावा बगलों में किसी अच्छे अंडरआर्म डिओडोरेंट का प्रयोग करें। शरीर पर लगाने के लिए भी भीनी सुगंध वाले डिओडोरेंट का प्रयोग करें। इससे मन प्रसन्न रहेगा।

• भारी मेकअप से बचें। भूल कर भी गहरे फाउंडेशन का प्रयोग न करें। चेहरे के दाग छिपाने हों तो हल्का सा कंसीलर लगा कर मॉयश्चराइजर लगा लें।

• यदि त्वचा अधिक तैलीय हो तो लूज पाउडर का प्रयोग भी ताजगी में इजाफा करता है। इसको हल्के से पफ में लेकर थपथपा लें। स्नान के बाद शरीर पर टेलकम पाउडर का प्रयोग अवश्य करें।

• ऐसे साबुन का चुनाव करें जो तैलीय त्वचा के लिए उपयुक्त हो। इसके अलावा कुछ कुछ घंटों के अंतराल पर चेहरे और हाथ पैरों को अवश्य धो लें।

• पर्स में हमेशा सुगंधित नरम पेपर नैपकिन अवश्य रखें। इससे मुंह पोंछने से बहुत ताजगी मिलती है। पर्स में ही किसी छोड़े डब्बे में एस्ट्रिजेंट से डूबी रुई भी रखें। इससे भी चेहरा पोंछा जा सकता है और ताजगी महसूस की जा सकती है।
 
• मौसम के अनुरूप लिपस्टिक व नेल पालिश का चुनाव करें। ऐसे में पेस्टल रंग ताजगी का अहसास कराते हैं।

• कुछ महिलाएं नींद की या तनाव की गोलियां खाने की आदत से ग्रस्त होती हैं। ये दवाएं बेशक मीठी नींद देती हों पर अगले दिन उनींदापन भी चेहरे पर छोड़ जाती हैं। अतएव स्वाभाविक नींद सोने की कोशिश करें और तनाव से बचें।

• सुबह उठते ही मुंह में पानी भर कर आंखों में ठंडे पानी के छींटे मारने से दिन भर तरोताजा रहा जा सकता है।

• सुबह उठते ही नरम हरी दूब पर नंगे पांव चलने से चेहरे पर स्वाभाविक ताजगी आ जाती है।

• फूल पौधों पर पड़ी ओस को रुई में लेकर मुंह पर लगाने से ताजगी बनी रहती है।

• चेहरे पर हल्दी सी मुस्कराहट रखें, अनावश्यक रूप से भौंहों में पड़े बल ताजगी के दुश्मन हैं।

• सुबह तैयार होने से पूर्व बर्फ के टुकड़े चेहरे पर मलने से त्वचा स्निग्ध व ताजगी से भरपूर दिखती है।

• ऐसे वस्त्रों का चयन करें, जो हल्के व सौम्य हों। गहरे रंग के भारीभरकम कपड़ों से बचें। इस तरह इन उपायों को ध्यान में रख कर आप हमेशा तरोजाता बनी रह सकती हैं। तरोताजा लुक की महिलाएं हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र हुआ करती हैं और स्वयं का चित्त भी हमेशा प्रसन्न रहता है।
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