ज्योतिषमान जागृत जगत की एक ज्योति का नाम ही जीवन है। ज्योति का पर्याय
ज्योतिष है अथवा ज्योतिस्वरूप ब्रह्म की व्याख्या का नाम ज्योतिष है।
वेदरूप ज्योतिष ब्रह्मरूप ज्योति का ज्योतिष है जिसका द्वितीय नाम संवत्कर
ब्रह्म या महाकाल है।
ब्रह्म सृष्टि के मूल बीजाक्षरों या मूल अनन्त कलाओं को एक-एक कर जानना
वैदिक दार्शनिक ज्योतिष कहा जाता है। इसका दूसरा स्वरूप लौकिक ज्योतिष है
जिसे खगोलीय या ब्रह्माण्डीय़ ज्योतिष कहा जाता है। व्यक्त या अव्यक्त इन
दोनों के आकार, दोनों की कलायें एक समान हैं। वैदिक दर्शन के लिए यह
वेदांगी ज्योतिष दर्शन सूर्य के समान प्रकाश देने का काम करता है इसी कारण
इसे ब्रह्मपुरुष का चक्षु कहा गया है।
ज्योतिषशास्त्र की व्युत्पत्ति
‘‘ज्योतिषां सूर्यादि ग्रहाणां बोधकं
शास्त्रम’’
की गई है। अर्थात् सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को
ज्योतिषशास्त्र कहा जाता है । भारतीय ज्योतिषशास्त्र की परिभाषा के
स्कन्ध-त्रय-होरा, सिद्धान्त और संहिता अथवा स्कन्ध पंच होरा, सिद्धान्त,
संहिता, प्रश्न और शकुन ये अंग माने गये हैं।
यदि विराट पंचस्कन्धात्मक
परिभाषा का विश्लेषण किया जाये तो आज का मनोविज्ञान, जीवविज्ञान, पदार्थ
विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं चिकित्साशास्त्र इत्यादि इसी के अन्तर्भूत हो
जाते हैं। बिना आँख के जैसे दृश्य जगत का दर्शन असम्भव है वैसे ही ज्योतिष
के बिना ज्ञान के विश्वकोश वेद भगवान् का दर्शन भी असम्भव है।
‘सा
प्रथमा संस्कृति विश्ववारा।’ का उद्घोष करने वाले वेद ने भारतीय
संस्कृति को विश्व की सर्वप्रथम संस्कृति माना है। यदि हम इस प्राचीनतम
श्रेष्ठ संस्कृति से पुनः जुड़ना चाहते हैं तो हमें ज्योतिष का ज्ञान
अनिवार्य रूप से प्राप्त करना होगा। हमें हमारी संस्कृति से जोड़ने का
सेतु ज्योतिष ही है। यदि हमारे सभी देशवासी अपनी संस्कृति से जुड़ गये तो
धरती पर देवत्व का अवतरण करके रहेंगे।
ज्योतिष ज्ञान सबका मंगल करे। विकृत मान्यताओं से उबारे। इसी लक्ष्य को
लेकर ‘ज्योतिष शब्द कोश’ की रचना की गई है। इससे आप
उन
प्रारम्भिक सोपानों पर तो चढ़ ही सकते हैं जो हममें अमित शक्ति का
प्रादुर्भाव कर सकते हैं।
इस ज्योतिष शब्द कोश’ में भारतीय ज्योतिष का इतिहास व प्रमुख
ज्योतिर्विदों एवं उनकी कृतियों का परिचय दिया गया है जिससे हमें यह
स्पष्ट ज्ञान हो जाये कि ऋग्वेद की रचना से लेकर अब तक हमने इस विज्ञान के
द्वारा विश्व को क्या-क्या दिया ? ज्योतिष के प्रायः सभी अंगों का इस
‘कोश’ में समावेश है।
जटिल गणनाओं पर अधिक ध्यान न
देते हुए
ज्योतिष के व्यावहारिक स्वरूप का जनसाधारण को परिचय कराना ही प्रस्तुत
‘कोश’ का उद्देश्य है।















