Shayar Ki Shadi - A Hindi Book by - Mukesh Nadan - शायर की शादी - मुकेश नादान
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Shayar Ki Shadi

शायर की शादी

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मुकेश नादान<<आपका कार्ट
मूल्य$ 1  
प्रकाशकनेशनल बुक ट्रस्ट,इंडिया
आईएसबीएन81-8099-012-5
प्रकाशितजनवरी ०६, २००३
पुस्तक क्रं:6233
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Shayar Ki Sadi A Hindi Book by Mukes Nadan

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

शायर की शादी
पात्र-परिचय


* शायर
* जुम्मन
* जाकिर

पहला दृश्य


मंच पर दो दोस्त
जाकिर और जुम्मन
आपस में अपने
शायर दोस्त की
बातें करते हैं।

जुम्मन : अमां जाकिर मियां, याद है हमारा एक दोस्त हुआ करता था, अरे वही, जो शायरी भी किया करता था। सुना है उसका निकाह हो गया है ?
जाकिर : (ठण्डी सांस लेकर) हां जुम्मन भाई ! सुना तो मैंने भी है कि बेचारे की शादी हो गयी। अब तो वह भी हमारी तरह ही घर-गृहस्थी का बोझ ढोया करेगा, चलो शादी-शुदाओं की बिरादरी में इजाफा तो हुआ, भई।

जुम्मन : वो तो ठीक है मियां, पर सुना है बेचारे के साथ कोई हादसा हो गया है।
जाकिर : अमां, जुम्मन मियां ! शादी से बड़ा भी कोई हादसा हो सकता है भला ?

जुम्मन : अमां मियां, मैं शादी के हादसे की बात नहीं कर रिया। (कान के पास मुँह लगाकर) मैंने तो ये सुना है मियां कि लड़की वालों ने लड़की दिखाकर, उसकी खाला से उसका निकाह कर दिया है।

जाकिर : अमां मियां ! क्यों शादी-शुदा की बद्दुआ लेते हो, कहीं ऐसा भी हुआ है क्या ? मुझे तो यकीन नहीं आ रिया मियां, जुम्मन भाई !

जुम्मन : खुदा कसम यकीन तो मुझे भी नहीं आ रिया जाकिर भाई। पर मियां, घर का आदमी झूठ नहीं बोल सकता, और मियां अगर तुम्हें अब भी यकीन ना आ रिया हो तो चलो, चलकर पूछ भी आवेंगे और निकाह की मिठाई भी खा आवेंगे।
जाकिर : बात तो पते की कह रहे हो मियां ! (आंखें मटकाते हुए
जुम्मन : तो चलें फिर।
जाकिर : चलो मियां आज बेचारे शायर साहब का भी दुखड़ा सुन लिया जावे।


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