Bhachhon Ki Rochak Kahaniyan - A Hindi Book by - Mukesh Nadan - बच्चों की रोचक कहानियाँ - मुकेश नादान
Hindi / English

शब्द का अर्थ खोजें

पुस्तक विषय
नई पुस्तकें
कहानी संग्रह
कविता संग्रह
उपन्यास
नाटक-एकाँकी
लेख-निबंध
हास्य-व्यंग्य
व्यवहारिक मार्गदर्शिका
गजलें और शायरी
संस्मरण
बाल एवं युवा साहित्य
जीवनी/आत्मकथा
यात्रा वृत्तांत
भाषा एवं साहित्य
प्रवासी लेखक
संस्कृति
धर्म एवं दर्शन
नारी विमर्श
कला-संगीत
स्वास्थ्य-चिकित्सा
योग
बोलती पुस्तकें
इतिहास और राजनीति
खाना खजाना
कोश-संग्रह
अर्थशास्त्र
वास्तु एवं ज्योतिष
सिनेमा एवं मनोरंजन
विविध
पर्यावरण एवं विज्ञान
पत्र एवं पत्रकारिता
ई-पुस्तकें
अन्य भाषा

मूल्य रहित पुस्तकें
सुमन
पांच पापी
चन्द्रकान्ता
कृपया दायें चलिए
प्रेम पूर्णिमा

मार्च १८, २०१३
पुस्तकें भेजने का खर्च
पुस्तकें भेजने के सामान्य डाक खर्च की जानकारी
आगे
Bhachhon Ki Rochak Kahaniyan

बच्चों की रोचक कहानियाँ

<<खरीदें
मुकेश नादान<<आपका कार्ट
मूल्य$ 2.95  
प्रकाशकआत्माराम एण्ड सन्स
आईएसबीएन81-7043-488-2
प्रकाशितजनवरी ०२, २००३
पुस्तक क्रं:5049
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Bachchon Ki Rochak Kahaniyan -A Hindi Book by Mukesh Nadan - बच्चों की रोचक कहानियाँ - मुकेश नादान

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

नगाड़े की आवाज

एक जंगल में एक सियार रहता था। कई दिन से भूखा रहने के कारण वह कमजोर हो गया था। एक दिन उसने दूर जंगल में नगाड़ा बजने की आवाज सुनी। नगाड़े की आवाज सियार के कानों में पहली बार पड़ी थी। इसलिए उसने सोचा कि हो सकता है कि दूर कोई जानवर हो जिसे मारकर मैं अपनी भूख मिटा सकूँ।
यह सोचकर सियार उस ओर चल प़डा जिधर से नगाड़े की आवाज आ रही थी ।
भूख और कमजोरी के कारण सियार से चला नहीं जा रहा था, किन्तु मरता क्या न करता ! अतः वह झाड़ियों और काँटों के बीच से निकलता हुआ वहाँ जा पहुँचा।

सियार ने नगाड़े के पास जाकर देखा। नगाड़ा खून और माँस से सना हुआ था। क्योंकि कुछ समय पहले दो सेनाओं का युद्ध हुआ था। युद्ध समाप्ति के बाद वह नगाड़ा एक पेड़ की आड़ में पड़ा था, जिस पर सैनिकों के खून व माँस के चिथड़े लगे थे। पेड़ की टहनी हवा से हिलकर नगाड़े से टकराती थी तो नगाड़ा आवाज करने लगता था।
खून और माँस को देखकर सियार को लगा जैसे कोई पेट भरने की चीज उसके हाथ लगी हो। सियार कई दिनों से भूखा था। इसलिए कूदकर वह नगाड़े के ऊपर चढ़ गया और अपने तेज दाँतों से नगाडे पर बँधा चमड़ा काटने लगा।

मुख्र्य पृष्ठ  

No reviews for this book..
Review Form
Your Name
Last Name
Email Address
Review
 

   

पुस्तक खोजें

चर्चित पुस्तकें


सोने का किला
    सत्यजित राय

कुरु कुरु स्वाहा
    मनोहर श्याम जोशी

अग्निव्यूह
    श्रीराम दूबे

अमली
    हृषीकेश सुलभ

तत सम
    राजी सेठ

लाल पसीना
    अभिमन्यु अनत

  आगे

समाचार और सूचनाऍ

मार्च १५, २०१२
हमारे संग्रह में ई पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। कुछ ई-पुस्तकें यहाँ देखें।
आगे...

Font :