670 Sunhala Nevala - A Hindi Book by - Anant Pai - 670 सुनहला नेवला - अनन्त पई
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670 Sunhala Nevala

670 सुनहला नेवला

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मूल्य$ 2.45  
प्रकाशकइंडिया बुक हाउस लिमिटेड
आईएसबीएन81-7508-408-1
प्रकाशितजनवरी ०३, २००७
पुस्तक क्रं:4978
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Sunahala Nevala -A Hindi Book by Anant Pai -सुनहला नेवला अनन्त पई

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

उपनिषद में कहा गया है,‘‘अतिथि देवो भव’ अर्थात् अतिथि देवता के समान हैं। ‘सुनहला नेवला’ और कबूतर का त्याग’ नामक कथाओं में य़ही बताया गया है कि प्राचीन काल में आतिथ्य धर्म किस सीमा तक निभाया जाता था।
‘ज्ञानी कसाई’ में कर्तव्य का महत्व बताया गया है। साथ ही सत्य की प्राप्ति के मार्ग में धर्म और कर्म के अटूट संबंध को भी दर्शाया गया है।
इस चित्र कथा की तीनों कथाएँ महाभारत से ली गयी हैं।

सुनहरा नेवला


एक बार हस्तिनापुर के राजा ने महान अश्वमेध यज्ञ किया।
उन्होंने यज्ञ कराने वाले पुरोहितों को हजारों स्वर्ण मुद्राएं वितरित की।
वहाँ उपस्थित पण्डितों को कीमती उपहार दिये.....
....लँगड़ों, अँधों और गरीबों को दान दिया।
किसी भी राजा द्वारा किया महानतम यज्ञ था।
ऐसे अवसर पर दी जाने वाली दक्षिणा से तिगुनी दक्षिणा दी है।
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