552 Tansen - A Hindi Book by - Anant Pai - 552 तानसेन - अनन्त पई
Hindi / English

शब्द का अर्थ खोजें

पुस्तक विषय
नई पुस्तकें
कहानी संग्रह
कविता संग्रह
उपन्यास
नाटक-एकाँकी
लेख-निबंध
हास्य-व्यंग्य
व्यवहारिक मार्गदर्शिका
गजलें और शायरी
संस्मरण
बाल एवं युवा साहित्य
जीवनी/आत्मकथा
यात्रा वृत्तांत
भाषा एवं साहित्य
प्रवासी लेखक
संस्कृति
धर्म एवं दर्शन
नारी विमर्श
कला-संगीत
स्वास्थ्य-चिकित्सा
योग
बोलती पुस्तकें
इतिहास और राजनीति
खाना खजाना
कोश-संग्रह
अर्थशास्त्र
वास्तु एवं ज्योतिष
सिनेमा एवं मनोरंजन
विविध
पर्यावरण एवं विज्ञान
पत्र एवं पत्रकारिता
ई-पुस्तकें
अन्य भाषा

मूल्य रहित पुस्तकें
सुमन
चन्द्रकान्ता
कृपया दायें चलिए
प्रेम पूर्णिमा
हिन्दी व्याकरण

अगस्त ०३, २०१४
पुस्तकें भेजने का खर्च
पुस्तकें भेजने के सामान्य डाक खर्च की जानकारी
आगे
552 Tansen

552 तानसेन

<<खरीदें
अनन्त पई<<आपका कार्ट
मूल्य$ 2.45  
प्रकाशकइंडिया बुक हाउस लिमिटेड
आईएसबीएन81-7508-055-8
प्रकाशितजनवरी ०२, २००७
पुस्तक क्रं:4974
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Tansen A Hindi Book by Anant Pai - तानसेन- अनन्त पई

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश


हर एक युग का अपना महान गायक हुआ करता है। मुगल सम्राट अकबर के समकालीन तानसेन भारतीय संगीत में सर्वोच्च सफलता के प्रतीक माने जाते हैं। तानसेन सिर्फ एक महान् गायक ही नहीं वरन् एक महान संगीतशास्त्री एवं रागों के रचयिता भी थे। जाति एवं रागों की प्राचीन मान्यताओं को तोड़ कर नये प्रयोगों की परंपरा को प्रारम्भ करने में वे अग्रणी थे।
भारतीय संगीत में स्वरलिपि की कोई पद्धति नहीं होने के कारण प्राचीन गायकों की स्वररचना को जानने का कोई साधन नहीं है। संगीत के क्षेत्र में आज भी तानसेन का प्रभाव जीवित है। उसका कारण है ‘‘मियाँ की मल्हार’’ ‘‘दरबारी कानडा’’ और ‘‘मियाँ की तोड़ी’’ जैसी मौलिक स्वर रचनाओं का सदाबहार आकर्षण। उस समय के लोकप्रिय राग ध्रुपद की समृद्धता का कारण भी तानसेन की प्रतिभा ही थी।

तानसेन के दीपक राग से दीप के जल उठने एवं राग मेघ-मल्हार से वर्षा होने की किंवदंतियों के ऐतिहासिक प्रमाण भले ही न हों, किन्तु उनमें इस सत्यता का अंश जरूर है कि अगर तानसेन जैसा महान गायक हो तो संगीत में असीम संभावनाएँ निहित हैं।

तानसेन


तानसेन की गणना भारत के महान संगीतज्ञों में की जाती है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनका योगदान अभूतपूर्व है। सौभाग्य से उन्हें संगीत-कला को प्रोत्साहन देनेवाला महान् मुगल सम्राट अकबर जैसा संरक्षक मिल गया।
ग्वालियर के निकट छोटे से कस्बे बेहट में मुकुन्द-राम मिश्र नाम के एक गायक रहते थे। वह धनी तो थे ही, लोकप्रिय भी थे। किन्तु उनके कोई सन्तान नहीं थी।

बच्चों की किलकारी के बगैर यह घर निर्जीव-सा लगता है !
काश हमारी एक सन्तान होती !
दिवाली की शुभकामनाएँ मिश्र जी !
शुभ-कामनाएँ आपके लिए, न कि हमारे वीरान घर के लिए !

मुख्र्य पृष्ठ  

No reviews for this book..
Review Form
Your Name
Last Name
Email Address
Review
 

   

पुस्तक खोजें

चर्चित पुस्तकें


अनंत नाम जिज्ञासा
    अमृता प्रीतम

हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे
    शरद जोशी

मुल्ला नसरुद्दीन के किस्से
    मुकेश नादान

आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश
    बदरीनाथ कपूर

औरत के लिए औरत
    नासिरा शर्मा

वक्त की आवाज
    आजाद कानपुरी

  आगे

समाचार और सूचनाऍ

अगस्त ०३, २०१४
हमारे संग्रह में ई पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। कुछ ई-पुस्तकें यहाँ देखें।
आगे...

Font :