Macbeth - A Hindi Book by - Rangey Raghav - मैकबेथ - रांगेय राघव
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Macbeth

मैकबेथ

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रांगेय राघव<<आपका कार्ट
मूल्य$ 4.95  
प्रकाशकराजपाल एंड सन्स
आईएसबीएन81-7028-328-0
प्रकाशितजनवरी ०१, २००७
पुस्तक क्रं:4840
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Makbeth

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

विश्व साहित्य के गौरव, अंग्रेज़ी भाषा के अद्वितीय नाटककार शेक्सपियर का जन्म 26 अप्रैल, 1564 ई. को इंग्लैंड के स्ट्रैटफोर्ड-ऑन-एवोन नामक स्थान में हु्आ। उनके पिता एक किसान थे और उन्होंने कोई बहुत उच्च शिक्षा भी प्राप्त नहीं की। इसके अतिरिक्त शेक्सपियर के बचपन के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। 1582 ई. में उनका विवाह अपने से आठ वर्ष बड़ी ऐन हैथवे से हुआ। 1587 ई. में शेक्सपियर लंदन की एक नाटक कम्पनी में काम करने लगे। वहाँ उन्होंने अनेक नाटक लिखे जिनसे उन्होंने धन और यश दोनों कमाए। 1616 ई. में उनका स्वर्गवास हुआ।
प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार रांगेय राघव ने शेक्सपियर के दस नाटकों का हिन्दी अनुवाद किया है, जो इस सीरीज में पाठकों को उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

भूमिका


‘मैकबेथ’ शेक्सपियर के दुखान्त नाटकों में अत्यन्त लोकप्रिय है। इनके रचनाकाल के संबंध में यद्यपि मतभेद है, तथापि नाटक के पात्रों और उसकी रचना शैली से पता चलता है कि शेक्सपियर ने इसकी रचना ‘सम्राट लियर’ के पश्चात् की थी। इस प्रकार इसका रचनाकाल सन् 1605-6 में ठहरता है। वस्तुत:यह युग शेक्सपियर जैसे महान मेधावी नाटककार के लिए अपनी दु:खान्त कृतियों के अनुकूल भी था।

शेक्सपियर ने जिस प्रकार अपने अन्य नाटकों के कथानकों के लिए दूसरी पूर्ववर्ती कृतियों से प्रेरणा ली है उसी प्रकार मूल रूप में ‘मैकबेथ’ का कथानक भी उसका अपना नहीं है। यह एक दु:खान्त नाटक है एवं इसके कथानक का आधार विश्वविश्रुत अंग्रेजी लेखक राफेल होलिन्शेड की स्कॉटलैण्ड-संबंधी एक ऐतिहासिक कृति है।
‘मैकबेथ’ में जिन घटनाओं का वर्णन है उन्हें पूर्णतया ऐतिहासिक अथवा काल्पनिक मान लेना भी युक्तियुक्त न होगा। ‘कॉनसाइज डिक्शनरी ऑफ नेशनल बायोग्राफी’ में ‘मैकबेथ’ के अन्तगर्त लिखा है- ‘‘ ‘मैकबेथ’ (मृ.1057) स्कॉटलैण्ड का बादशाह; स्कॉटलैण्ड के राजा डंकन की फौंजों का कमाण्डर तथा 1040 में उस कत्ल कर राज्य पर अपना अधिकार करनेवाला, जिसे नॉर्थम्ब्रिया के अर्ल सिवार्ड ने 1054 में हराया तथा 1057 में मैलकॉम तृतीय ने मार डाला।’’

मैकबेथ के संबंध में इतिहास में और अधिक स्पष्ट उल्लेख न मिलने के कारण शेक्सपियर ने होलिन्शेड द्वारा कथित मैकबेथ के कथा-तत्त्व को अपने मनोनुकूल ढालने में स्वतंत्रता से काम लिया। उसका उद्देश्य जितना दु:खान्त नाटक लिखने का था उतना ऐतिहासिक नाटक लिखने का नहीं। अपनी अप्रतिम प्रतिभा से पात्रों का चयन कर, उन्हें नईं साज-सज्जा में प्रस्तुत कर, एवं घटनाओं का प्रभावोत्पादक वर्गीकरण करने के पश्चात्, शेक्सपियर मुख्य ऐतिहासिक घटना से कही अधिक अपनी इस कृति में रोचकता उत्पन्न करने में सफल हुआ है।

‘मैकबेथ’ का प्रकाशन शेक्सपियर की मृत्यु के पश्चात् हुआ। इसमें आरम्भ से अन्त तक जीवन और मृत्यु का रोमांचक संघर्ष वर्णित है। भयानक अमानुषीय घात-प्रतिघातों से दर्शक द्रवित एवं उद्वेलित हो उठते हैं। ‘मैकबेथ’ में जीवन के प्रति व्यंग्य भी प्रभूत मात्रा में मुखरित है। इसमें शेक्सपियर ने अपनी असाधारण एवं रहस्यपूर्ण मन:शक्ति को सन्तुष्ट करने के लिए दो हत्यारों की अवतारणा की है और जैसा कि साधारणतया उसकी सभी कृतियों में होता है, इन दोनों हत्यारों में विवेकपूर्ण स्पष्ट अंतर भी दर्शाया है। हत्यारा होते हुए भी एक के प्रति दर्शक की सहानुभूति उमड़ पड़ती है और दूसरे के प्रति घृणा का उद्रेक।

प्रत्येक मनुष्य में जब दानवता जागरित होती है, उसकी मनुष्यता लुप्त हो जाती है; किन्तु जीवन में ऐसे भी स्थल आते हैं जहाँ वह परम क्रूर होते हुए भी अपनी मानवोचित भावनाओं से संचालित होने लगता है।
मानव-मन की गहराइयों का व्यंग्यपूर्ण अंकन ‘मैकबेथ’ की विशेषता है। शेक्सपियर एक महान नाटककार है और ‘मैकबेथ’ उसकी अन्य महान कृतियों में अपना प्रमुख स्थान रखता है।

रांगेय राघव

पात्र-परिचय

डंकन :   स्कॉटलैण्ड का सम्राट्
मैलकाम,
डोनलबेन : सम्राट के पुत्र

मैकबेथ,
बैंको,
लौनोक्स  : सम्राट की सेना के प्रमुख

मैकडफ,
रौस,
मैंटियथ,
ऐंगस,
कैथनिस : स्कॉटलैण्ड के भद्र पुरुष
फ्लीन्स : बैंको का पुत्र
सिवार्ड : नॉर्थम्बरलैण्ड का अर्ल और अँग्रेजी सेना का प्रमुख
युवक सीवार्ड : सिवार्ड का पुत्र
सीटॉन : मैकबेथ का अफसर
लड़का : मैकडफ का पुत्र
लेडी मैकबेथ : मैकबेथ की पत्नी
लेडी मैकडफ : मैकडफ की पत्नी।
[लेडी मैकडफ की परिचारिकाँ, हिकेट और तीन डाइन]
[अंग्रेजी डॉक्टर, स्कॉट, डाक्टर, सार्जेन्ट, कुली, वृद्ध पुरुष, हत्यारे, भद्रपुरुष, अफसर, सिपाही, परिचायिकाएँ और दूत; बैकों का भूत एवं पिशाच इत्यादि।]  


पहला अंक



दृश्य 1


[एक निर्जन स्थान]
[बादलों की गड़गड़ाहट के बीच बिजली चमकती है। तीनों डायनों का प्रवेश]

पहली डाइन : ऐसे समय में जब गड़गड़ाहट करते बादलों के बीच बिजली फट रही हो और पानी बरसता हो, हम तीनों फिर कब मिलेंगी ?
दूसरी डाइन : उसी समय जब यह युद्धनाद शांत होकर, यह घोषणा हो जाए कि कौन जीत गया है और कौन हार गया।
तीसरी डाइन : पर वह तो सूरज छिपने से पहले हो जाएगा।
पहली डाइन : पर हाँ, मिलेंगे कहाँ ?
दूसरी डाइन : उसी उजाड़ में।
तीसरी डाइन : वहाँ तो हमें मैकबेथ भी मिलेगा न ?
पहली डाइन : आई, ग्रेमल्किन1।
दूसरी डाइन : पैडोक2 मेरे पीछे पुकार रहा है।
तीसरी डाइन : अभी एक क्षण में।
सभी: जिसमें दूसरों की भलाई है उससे हमें घृणा है और जिससे वे बुरा समझकर घृणा करते हैं वही हमारे लिए अच्छा है। आओ, कोहरे
---------------------------------------------------------------------
1.    Graymalkin (ग्रेमल्किन) एक तरह की भूरी बिल्ली का नाम। प्रत्येक डाइन अपने साथ इस तरह का कोई पशु या पक्षी रखती है जो उसके इशारे पर कोई भी रूप बदल सकता है। इससे वे दूसरों पर जादू किया करती है।
2.    Paddock (पैडोक)- इसी तरह एक मेढ़क का नाम।


और धुंध-भरी हवा में होकर उड़ चलें।
 (सभी जाती हैं)


दृश्य 2



(फौरेस के निकट एक शिविर)

(अन्दर तूर्य ध्वनि। सम्राट् डंकन, मैलकॉम, डोनलबेन, लौनोक्स का अनुचरों के साथ प्रवेश। खून से भीगा हुआ सार्जेण्ट आता है।)

डंकन : कौन है यह, जो इस तरह खून से भीगा हुआ है। उसकी दयनीय अवस्था से लगता है कि वह अभी रणभूमि से लौटा है। उससे हमें विद्रोहियों के बारे में नवीनतम परिस्थिति का अवश्य कुछ पता लगेगा।

मैलकॉम : अरे, यह तो वही सर्जेण्ट है जो वफादार वीर सैनिक की तरह मुझे बन्दी होने से बचाने के लिए लड़ा था। स्वागत है, मेरे पराक्रमी मित्र ! जिस समय तुम रणभूमि से चले थे उस समय युद्ध की क्या स्थिति थी, सम्राट् यह तुमसे जानना चाहते हैं।

सार्जेण्ट : अभी से कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता, स्वामी ! दोनों सेनाओं के बीच अभी वैसा संघर्ष जारी है जैसा होड़ में बढ़ते दो तैराक में होता है। जब वे पूरी तरह थक जाते हैं तो आपस में लिपटकर एक-दूसरे की चालों को काटने की कोशिश करते हैं। एक निर्दय मेकडोनवाल्ड में, जिसमें दुष्टता प्रतिदिन बढ़ती जाती है और जो स्वभाव से ही विद्रोही है, आयलैंड से हल्के शस्त्रों से सुसज्जित अश्वारोही बुलवा लिए हैं। लेकिन कुछ भी हो, वीर मैकबेथ के सामने वे सब कायर हैं। वे साक्षात् देवी वीरता के पुत्र हैं। मैंने देखाकि भाग्य को उपेक्षा-भरी दृष्टि से देखते हुए और अपनी तलवार घुमाकर मार-काट करते हुए जिस तरह उन्होंने शत्रु के सीने तक पहुँचने का मार्ग बना लिया था, उससे सच ही वे वीर कहलाने के अधिकारी हैं। वे तब तक वहाँ से नहीं हटे, जब तक उन्होंने शत्रु के जबड़े तक नहीं काट दिए और उसके सिर को काटकर हमारे मोर्चे को मुडेर पर नहीं टाँग दिया।




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