भागवत पुराण में बताया गया है कि नरकासुर भूमि माता का पुत्र था। पशुओं से
भी ज्यादा क्रूर और अधम था।
नरक की करतूतें ऐसी काली थीं कि उसका नाम ही अंधेरे का प्रतीक बन गय़ा।
दीपावली के त्यौहार के साथ यह मान्यता भी जुड़ी है कि नरक की मृत्यु होने
से उस दिन शुभ आत्माओं को मुक्ति मिली थी। दक्षिण भारत में नरक की कथा में
नारी स्वतन्त्रता का भी पुट है उस कथा के अनुसार, कृष्ण ने लड़ते-लड़ते थक
कर क्षण भर को अपनी आँखें बन्द कर ली तो सत्यभामा ने उस असुर से लोहा
लिया। पुराण में इस बात का उल्लेख नहीं है।
धर्म-गाथाओं और कविताओं में कृष्ण को अनेक बार नरकारि (नरक का
शत्रु) और मुरारि (नरक के साथी , मुर का शत्रु) कहा गया है। इससे ज्ञात
होता है कि प्राग्जोतिषपुर का यह अत्याचारी शासक बहुत बदनाम था।















