635 Aamrapali Aur Upgupt - A Hindi Book by - Anant PaI - 635 आम्रपाली और उपगुप्त - अनन्त पई
Hindi / English

शब्द का अर्थ खोजें

पुस्तक विषय
नई पुस्तकें
कहानी संग्रह
कविता संग्रह
उपन्यास
नाटक-एकाँकी
लेख-निबंध
हास्य-व्यंग्य
व्यवहारिक मार्गदर्शिका
गजलें और शायरी
संस्मरण
बाल एवं युवा साहित्य
जीवनी/आत्मकथा
यात्रा वृत्तांत
भाषा एवं साहित्य
प्रवासी लेखक
संस्कृति
धर्म एवं दर्शन
नारी विमर्श
कला-संगीत
स्वास्थ्य-चिकित्सा
योग
बोलती पुस्तकें
इतिहास और राजनीति
खाना खजाना
कोश-संग्रह
अर्थशास्त्र
वास्तु एवं ज्योतिष
सिनेमा एवं मनोरंजन
विविध
पर्यावरण एवं विज्ञान
पत्र एवं पत्रकारिता
ई-पुस्तकें
अन्य भाषा

मूल्य रहित पुस्तकें
सुमन
चन्द्रकान्ता
कृपया दायें चलिए
प्रेम पूर्णिमा
हिन्दी व्याकरण

अगस्त ०३, २०१४
पुस्तकें भेजने का खर्च
पुस्तकें भेजने के सामान्य डाक खर्च की जानकारी
आगे
635 Aamrapali Aur Upgupt

635 आम्रपाली और उपगुप्त

<<खरीदें
अनन्त पई<<आपका कार्ट
मूल्य$ 2.45  
प्रकाशकइंडिया बुक हाउस लिमिटेड
आईएसबीएन81-7508-479-0
प्रकाशितजनवरी ०१, २००६
पुस्तक क्रं:4789
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Amrapali Aur Upgupat A Hindi Book by Anant Pai आम्रपाली और उपगुप्त - अनन्त पई

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

आम्रपाली और उपगुप्त

भगवान् बुद्ध का मत था कि एक व्यक्ति की मुक्ति की अपेक्षा जन-जन का उद्धार अधिक महत्त्वपूर्ण है। सर्व-साधारण के हित के लिए ही उन्होंने संघ की स्थापना की। संघ को वास्तव में शोधकों का संगठन कह सकते हैं।

शुरू में संघ में स्त्रियों को शामिल नहीं किया जाता था। किंतु प्रिय शिष्य आनंद द्वारा स्त्रियों की पैरवी करने पर बुद्ध ने उन्हें संघ में स्थान देने की छूट दे दी। आम्रपाली तथा वासवदत्ता ऐसी दो स्त्रियां हैं जिन्होंने भोग और ऐश्वर्य का त्याग करके संन्यास लिया।

आम्रपाली की कथा महापरिनिब्बाण सूत्र में आती है। आम्रपाली ने अपना उद्यान भगवान् बुद्ध को भेंट किया था। गुप्तकाल में जब फाहियान भारत आया था तब भी वह उद्यान मौजूद था।

उपगुप्त बुद्ध के शिष्य थे। उनका मत था कि अहिंसा का तात्पर्य इतना ही नहीं है कि हिंसा को त्याग दो अपितु मानव का हित करना भी आवश्यक है। वासवदत्ता को जब समाज ने ठुकरा दिया और उसका कोई सहारा नहीं रहा तब उपगुप्त उसे अपने आश्रम में ले आये। दया और करुणा को वे सबसे बड़ा गुण मानते थे।
ये हि कथाएँ अमर चित्र कथा में प्रस्तुत हैं किंतु उनके बीभत्स भाग हमने निकाल दिये हैं।

प्राचीन वैशाली पर शासन करने वाले लिच्छवी सौंदर्य के उपासक थे। बड़े सुंदर-सुंदर उद्यान उन्होंने लगाये थे।
उद्यानों की देखभाल के लिए श्रेष्ठतम माली उन्होंने रखे थे।
एक दिन—

कौन है आम के पेड़ के नीचे ? कोई सुंदरी ! ऐसा अनुपम रूप !
वह उसके पास गया
आप कौन हैं, देवि ? क्या नाम है आपका ? कहाँ से आयी हैं ? कहाँ जायेंगी ?
मैं अनाम हूँ। मैं कहीं से नहीं आयी और जाने को कोई ठौर नहीं।


मुख्र्य पृष्ठ  

No reviews for this book..
Review Form
Your Name
Last Name
Email Address
Review
 

   

पुस्तक खोजें

चर्चित पुस्तकें


मेरा दावा है
    सुधा ओम ढींगरा

धूप से रूठी चाँदनी
    सुधा ओम ढींगरा

कौन सी जमीन अपनी
    सुधा ओम ढींगरा

  आगे

समाचार और सूचनाऍ

अगस्त ०३, २०१४
हमारे संग्रह में ई पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। कुछ ई-पुस्तकें यहाँ देखें।
आगे...

Font :