कविकुलकमलदिवाकर, कविताकामिनीकान्त तथा सरस्वती के वरद पुत्र महाकवि कालिदास परम शैव थे। उनकी द्रक्षापाकशालिनी अमर कृतियाँ दिगदिगन्तों तक व्याप्त हैं। समय समय पर इनकी कृतियों के देशी एवं विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी हुए हैं। उनके द्वारा रचित कुछ कृतियाँ रघुवंशम्, कुमारसंभवम्, मेघदूतम्, अभिज्ञानशाकुन्तलम्, विक्रमोर्वशीयम्, मालविकाग्निमित्रम आदि रचनाओं का विवरण इस ग्रन्थ में दिया गया है।