स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुकुर
नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता पंडित क्षुदिराम चटर्जी एक कर्मकांडी
ब्राह्मण थे। माता श्रीमती चंद्रमणि ईश्वरपरायणा धार्मिक महिला थीं।
परिवार में श्रीरामचन्द्र की पूजा अनन्य भक्ति से की जाती थी।
रामकृष्ण परमहंस के बचपन का नाम गदाधर था। जब वे अपनी मां के गर्भ में थे,
तब उन्हें (माँ को) स्वप्न में विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन होते रहते
थे। कभी उन्हें अपने शरीर से तरह-तरह की सुगंध आती हुई अनुभव होती, तो कभी
ऐसा लगता कि जैसे कोई देवता, उनसे बात कर रहा है।
एक दिन भयभीत होकर उन्होंने क्षुदिरामजी को बताया,
‘‘आजकल
मुझे स्वप्न में इतने देवी-देवताओं के दर्शन होते हैं कि कुछ बता नहीं
सकती। आज दोपहर को ही मुझे हंस पर बैठा एक दिव्य पुरुष दिखाई दिया। मुझे
देखकर वह मुस्कराया, फिर अदृश्य हो गया। ऐसा क्यों, हो रहा है ?
क्या मुझे कोई रोग हो गया है ?’’
क्षुदिराम जी ने उन्हें समझाते हुए बताया, ‘‘तुम्हारे
गर्भ
में एक महापुरुष पल रहा है, इसकी जानकारी एक दिन मुझे स्वप्न में एक देवता
ने दी थी। उसी महापुरुष के प्रभाव से तुम्हें ऐसे स्वप्न आते हैं। तुम
अपने मन में किसी तरह का वहम मत पालो।’’















