Ramkrishna Paramhans - A Hindi Book by - Sachin Sinhal - रामकृष्ण परमहंस - सचिन सिंहल
Hindi / English

शब्द का अर्थ खोजें

पुस्तक विषय
नई पुस्तकें
कहानी संग्रह
कविता संग्रह
उपन्यास
नाटक-एकाँकी
लेख-निबंध
हास्य-व्यंग्य
व्यवहारिक मार्गदर्शिका
गजलें और शायरी
संस्मरण
बाल एवं युवा साहित्य
जीवनी/आत्मकथा
यात्रा वृत्तांत
भाषा एवं साहित्य
प्रवासी लेखक
संस्कृति
धर्म एवं दर्शन
नारी विमर्श
कला-संगीत
स्वास्थ्य-चिकित्सा
योग
बोलती पुस्तकें
इतिहास और राजनीति
खाना खजाना
कोश-संग्रह
अर्थशास्त्र
वास्तु एवं ज्योतिष
सिनेमा एवं मनोरंजन
विविध
पर्यावरण एवं विज्ञान
पत्र एवं पत्रकारिता
ई-पुस्तकें
अन्य भाषा

मूल्य रहित पुस्तकें
सुमन
चन्द्रकान्ता
कृपया दायें चलिए
प्रेम पूर्णिमा
हिन्दी व्याकरण

मार्च १८, २०१३
पुस्तकें भेजने का खर्च
पुस्तकें भेजने के सामान्य डाक खर्च की जानकारी
आगे
Ramkrishna Paramhans

रामकृष्ण परमहंस

<<खरीदें
सचिन सिंहल<<आपका कार्ट
मूल्य$ 1.95  
प्रकाशकप्रभात प्रकाशन
आईएसबीएन81-7315-517-8
प्रकाशितअप्रैल ०४, २००५
पुस्तक क्रं:3364
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Ramkrishna Paramhans A Hindi Book by Sachin Singhal

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

रामकृष्ण परमहंस

स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुकुर नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता पंडित क्षुदिराम चटर्जी एक कर्मकांडी ब्राह्मण थे। माता श्रीमती चंद्रमणि ईश्वरपरायणा धार्मिक महिला थीं। परिवार में श्रीरामचन्द्र की पूजा अनन्य भक्ति से की जाती थी।

रामकृष्ण परमहंस के बचपन का नाम गदाधर था। जब वे अपनी मां के गर्भ में थे, तब उन्हें (माँ को) स्वप्न में विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन होते रहते थे। कभी उन्हें अपने शरीर से तरह-तरह की सुगंध आती हुई अनुभव होती, तो कभी ऐसा लगता कि जैसे कोई देवता, उनसे बात कर रहा है।

एक दिन भयभीत होकर उन्होंने क्षुदिरामजी को बताया, ‘‘आजकल मुझे स्वप्न में इतने देवी-देवताओं के दर्शन होते हैं कि कुछ बता नहीं सकती। आज दोपहर को ही मुझे हंस पर बैठा एक दिव्य पुरुष दिखाई दिया। मुझे देखकर वह मुस्कराया, फिर अदृश्य हो गया। ऐसा क्यों, हो रहा है ? क्या मुझे कोई रोग हो गया है ?’’

क्षुदिराम जी ने उन्हें समझाते हुए बताया, ‘‘तुम्हारे गर्भ में एक महापुरुष पल रहा है, इसकी जानकारी एक दिन मुझे स्वप्न में एक देवता ने दी थी। उसी महापुरुष के प्रभाव से तुम्हें ऐसे स्वप्न आते हैं। तुम अपने मन में किसी तरह का वहम मत पालो।’’

मुख्र्य पृष्ठ  

No reviews for this book..
Review Form
Your Name
Last Name
Email Address
Review
 

   

पुस्तक खोजें

चर्चित पुस्तकें


मेरा दावा है
    सुधा ओम ढींगरा

धूप से रूठी चाँदनी
    सुधा ओम ढींगरा

कौन सी जमीन अपनी
    सुधा ओम ढींगरा

  आगे

समाचार और सूचनाऍ

दिसम्बर १५, २०१३
हमारे संग्रह में ई पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। कुछ ई-पुस्तकें यहाँ देखें।
आगे...

Font :