स्यमन्तक मणि सूर्य देव धारण करते थे। वह मणि बहुत चमत्कारी थी और जिसके
पास रहती उस पर अनोखा प्रभाव दिखलाती थी। सज्जन के पास रहती तो उसका शुभ
करती और किसी दुष्ट के पास रहती तो उसका अनिष्ट करती। सूर्य ने अपने भक्त,
राजकुमार सत्राजित् से प्रसन्न हो कर वह मणि उसे दे दी तब किसी को, स्वयं
सत्राजित् को भी गुमान नहीं था कि वह क्या-क्या रंग दिखायेगी।
सत्राजित ने मणि अपने भाई, प्रसेन को दी और प्रसेन को एक सिंह ने मार
डाला। रीछों के राजा जाम्बवान् ने उस सिंह को मारा तो मणि उसे मिल गयी।
चूंकि कृष्ण ने इस मणि की प्रशंसा की थी, अतः सन्देह यह हुआ कि उन्होंने
उसे चुरा लिया है। इस कलंक से मुक्त होने के लिए कृष्ण ने मणि की खोज में
जंगलों की ख़ाक छानी। फिर अनेक रोचक घटनाएँ घटीं, जो यहाँ प्रस्तुत हैं।
यह कथा भागवत् पुराण पर आधारित है।















