538 Amrit-manthan - A Hindi Book by - Anant Pai - 538 अमृत-मंथन - अनन्त पई
Hindi / English

शब्द का अर्थ खोजें

पुस्तक विषय
नई पुस्तकें
कहानी संग्रह
कविता संग्रह
उपन्यास
नाटक-एकाँकी
लेख-निबंध
हास्य-व्यंग्य
व्यवहारिक मार्गदर्शिका
गजलें और शायरी
संस्मरण
बाल एवं युवा साहित्य
जीवनी/आत्मकथा
यात्रा वृत्तांत
भाषा एवं साहित्य
प्रवासी लेखक
संस्कृति
धर्म एवं दर्शन
नारी विमर्श
कला-संगीत
स्वास्थ्य-चिकित्सा
योग
बोलती पुस्तकें
इतिहास और राजनीति
खाना खजाना
कोश-संग्रह
अर्थशास्त्र
वास्तु एवं ज्योतिष
सिनेमा एवं मनोरंजन
विविध
पर्यावरण एवं विज्ञान
पत्र एवं पत्रकारिता
ई-पुस्तकें
अन्य भाषा

मूल्य रहित पुस्तकें
सुमन
चन्द्रकान्ता
कृपया दायें चलिए
प्रेम पूर्णिमा
हिन्दी व्याकरण

मार्च १८, २०१३
पुस्तकें भेजने का खर्च
पुस्तकें भेजने के सामान्य डाक खर्च की जानकारी
आगे
538 Amrit-manthan

538 अमृत-मंथन

<<खरीदें
अनन्त पई<<आपका कार्ट
मूल्य$ 2.45  
प्रकाशकइंडिया बुक हाउस लिमिटेड
आईएसबीएन81-7508-475-8
प्रकाशितजनवरी ०१, २००६
पुस्तक क्रं:3361
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Amrit Manthan A Hindi Book by Anant Pai - अमृत-मंथन - अनन्त पई

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

देवताओं द्वारा अमृत समुद्र से निकालकर उसे पीकर अमर होने की कथा। रोचक है और नाटकीय भी।
पहले दूध के समुद्र, क्षीरसागर को मथा गया। मथानी का काम लिया गया विशाल मन्दराचल पर्वत से; और नाग, वासुकि मथने की रस्सी बना।

भगवान विष्णु ने कछुए का रूप धर कर मंथन के समय मन्दाचल के आधार का स्थान ग्रहण किया।
यह लोकप्रिय कथा कुछ एक विभिन्नताओं के साथ सभी पुराणों व दोनों महाकाव्यों में मिलती है। उदाहरण के लिए, समुद्र में से निकलने वाली वस्तुओं की संख्या भिन्न मानी गयी है रामायण, महाभारत और पद्म पुराण में इनकी गिनती नौ बताई गयी है भागवत में यह संख्या दस है, वायु पुराण में बारह और मत्स्य पुराण में चौदह मानी गयी हैं। इसी प्रकार असुर, राहु की भूमिका के बारे में सब ग्रन्थ एकमत नहीं है।

हमारी कहानी भागवत और महाभारत पर आधारित है।

अमृत मंथन


एक बार महर्षि दुर्वासा पृथ्वी पर घूम रहे थे।
....कि तभी उन्होंने उड़ती हुई अप्सरा के हाथ में दिव्य पुष्पों की माला देखी...।
उन फूलों की सुगन्ध इतनी मादक थी कि हार को पाने की लालसा दुर्वासा के मन में बलवती हो। उठी।
हे सुन्दरी, मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ वह माला मुझे दे दो।

अवश्य लीजिए भगवान इस माला के योग्य आप नहीं होंगे तो कौन होगा !
महर्षि माला लेकर आगे बढ़े।
• इन्हें शिव जी के अंश का अवतार माना जाता है।



मुख्र्य पृष्ठ  

No reviews for this book..
Review Form
Your Name
Last Name
Email Address
Review
 

   

पुस्तक खोजें

चर्चित पुस्तकें


मेरा दावा है
    सुधा ओम ढींगरा

धूप से रूठी चाँदनी
    सुधा ओम ढींगरा

कौन सी जमीन अपनी
    सुधा ओम ढींगरा

  आगे

समाचार और सूचनाऍ

दिसम्बर १५, २०१३
हमारे संग्रह में ई पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। कुछ ई-पुस्तकें यहाँ देखें।
आगे...

Font :