यह ग्रन्थ आयुर्वेद के सब प्रकार के समाज के लिए प्रत्युप उपयोगी सिद्ध होगा। आजकल विद्यार्थियों को पंचकर्म विषय स्वतंत्र विषय के रूप में रखा गया है। इस ग्रन्थ की रचना योजनाबद्ध है और सभी विषय शास्त्रीय आधार पर स्पष्ट रूप से विवरण किये गये है।
इसे स्नातक कक्षा के विद्यार्थियों को पाठ्य विषय का ज्ञान उपलब्ध होगा। स्नातकोत्तर शिक्षण तथा अन्वेषण में लगे हुए छात्रों को प्रत्येक अध्यायान्त में चरकादि ग्रन्थ से दी हुई सन्दर्भ आदि तथा कार्मुक्ता का विवरण इस समस्या को समझने में और हल करने करने में एक पथ प्रदर्शक के रूप में उपयुक्त सामग्री होगी। इसी तरह प्रत्यक्ष कर्मा भिषग् को प्रत्येक विषय क्रमानुसार समझाया गया है जो नितान्त उपयोगी होगा।















