Unnati Ke 134 Gur - A Hindi Book by - Parkinson, Rustamji - उन्नति के 134 गुर - पार्किन्सन, रूस्तमजी
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Unnati Ke 134 Gur

उन्नति के 134 गुर

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पार्किन्सन, रूस्तमजी<<आपका कार्ट
मूल्य$9.95  
प्रकाशकराजपाल एंड सन्स
आईएसबीएन81-7028-659-X
प्रकाशितजनवरी ०१, २००६
पुस्तक क्रं:2686
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Unati Ke 134 Gur

प्रस्तुत है पुस्तक के कुछ अंश

मैनेजमेन्ट सैद्धान्तिक से अधिक व्यावहारिक विषय है, इस बात को सबसे पहले लेखकद्वय सी. नार्थकोट पार्किन्सन और एम. के. रूस्तमजी ने समझा, जिसका प्रमाण व्यावहारिक अनुभवों पर आधारित लोक प्रिय शैली में लिखी गई उनकी पुस्तकें हैं। दुनिया भर में बेहद सराही गई, पार्किन्सन-रूस्तमजी सीरीज की यह नवीनतम पुस्तक सफल मैनेजर (प्रबन्धक) बनने की निर्देशिका है, जिसमें 134 ऐसे छोटे-छोटे लेकिन बहुत महत्वपूर्ण सूत्र सूझाये गये हैं, जो किसी भी सफल और लोकप्रिय मैनेजर की गारन्टी माने जायेंगे। ये सूत्र कून्त्ज, टउन्सेण्ड लाकोका उर्विक ड्रकर आदि दुनिया के महानतम मैनेजमेन्ट विशेषज्ञों के अनुभवों का सार है, जिन्हें हल्के-फुल्के चुटकलों वाली सहज बोधगम्म शैली में रोचक कार्टूनों के साथ पेश किया गया है।
मैनेजर एग्जीक्यूटिव के पेशे से जुड़े महात्वाकांक्षी लोगों के लिए एक आदर्श पुस्तक। सात अध्यायों में संयोजित इस पुस्तक के अध्ययन का तरीका यह है कि रोज इसके कुछ पृष्ठ पढ़िये, उन पर अमल कीजिए और फिर आगे बढ़िये।...और वह दिन दूर नहीं जब आप सबसे सफल-सबसे लोक प्रिय मैनेजरों मे गिने जाने लगेंगे ।

अध्याय 1
मानव सम्बन्धों से आप भाग नहीं सकते


सूत्र-1
अच्छे मानव सम्बन्धों की शुरुआत.......

...यह शुरुआत औरों के प्रति ईमानदार और अच्छा व्यवहार करने की भावना से होती है। जो ऐसा करते हैं, उन्हें खुद उतना ही सम्मान मिलता है और साथ ही अच्छा बर्ताव और भलाई, लाभ के रूप में लौटकर आती है। सच्चे व्यवहार का हमेशा अच्छा असर पड़ता है। झुठा और मुँह दिखावे का व्यवहार एकदम पहचाना जाता है। और इसका हानिकारक परिणाम जल्द ही आ जाता है।

सूत्र-2
जो सीखें उसे व्यवहार में लायें

आपने मनोविज्ञान में कोई डिग्री ले रखी है या मानव व्यवहार की अच्छी दर्जन-भर किताबें पढ़ ली हैं, पर अगर आपने इन्हें अपने व्यवहार में नहीं अपनाया, तो इस डिग्री और पढ़ाई का कोई अर्थ नहीं रह जाता। आप क्या करते हैं, देखा यह जायेगा, न कि यह कि आप क्या जानते हैं। कहने में यह बड़ी सरल और मामूली बात लगती है, लेकिन करने में उतनी ही मुश्किल है। जो दिखने में ज्यादा जानकार लगते हैं, वही मानव व्यवहार में बड़ी गलतियाँ करते हैं। वह अपने ज्ञान का इस्तेमाल नहीं करते। हममें से ज़्यादातर लोग दिमाग़ का उतना इस्तेमाल नहीं करते, जितना करना चाहिए। लोगों के साथ व्यवहार के लिए अच्छे सिद्धान्त की खोज में आपको हर समय लगे रहना चाहिए। मैनेजमेन्ट के गुर सीखें, उन्हें व्यवहार में अपनाने की कोशिश करें। बिना प्रयास के कुछ नहीं हो सकता।

सूत्र-3
पहचान की लालसा

हर आदमी चाहता है कि लोग उसकी पहचान और उसके काम को मानें और उसको महत्त्व दें। यदि आप अपने कर्मचारियों से कामों का बेहतर परिणाम चाहते हैं, तो उनका खास ख़याल रखें। हर कर्मचारी को एहसास दिलायें कि आपके लिए, आपकी संस्था के लिए वह कितना अहम और महत्त्वपूर्ण है। उसका काम, उसका योगदान पूरी कम्पनी के लिए ज़रूरी है।

सूत्र-4
नियमित देखभाल

....ठीक उसी तरह आप अपने कर्मचारियों का, उनकी सुविधाओं और उनकी ज़रूरतों का हमेशा ध्यान रखें। अगर आप उनकी नियमित देखभाल करते हैं, तो वह बढ़िया काम करेंगे। जिस तरह गाड़ी को चलाने के लिए समय-समय पर तेल और ग्रीज़ की ज़रूरत पड़ती है, यही स्थिति कर्मचारियों की होती है, वह भी अपनी नियमित देखभाल चाहते हैं।
हर मैनेजर के लिए ज़रूरी है कि वह महीने-दो-महीने पर अपनी टीम के हर व्यक्ति से मिलकर उनकी दिक्कतों को जाने, उनका समाधान करे और उन्हें अच्छे काम के लिए प्रोत्साहित करे। यदि वह ऐसा नहीं कर पाता, तो परिणाम बुरे होते हैं। जिस तरह चलती हुई गाड़ी बिना, नियमित देखभाल के कहीं भी रुक जाती है, उसी तरह कर्मचारियों की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है।

सूत्र-5
व्यक्तिगत सम्पर्क

मनुष्य के सभी सम्बन्धों में व्यक्तिगत सम्पर्क का विशेष महत्त्व होता है। कर्मचारी भी आपसे यही आशा करता है कि आप उससे व्यक्तिगत सम्पर्क रखें, उसकी खुशी और संतोष का ख़याल रखें। एक सर्वे के अनुसार जहाँ अच्छा वेतन महत्त्वपूर्ण है, वहीं कर्मचारी इससे बढ़कर अपनी सराहना और प्रशंसा भी चाहता है।
निस्संदेह पैसे का महत्त्व है, लेकिन सिर्फ पैसा ही सब कुछ नहीं होता। आप अपने कर्मचारियों का ध्यान रखते हैं, उन्हें सन्तुष्ट रखते हैं, तो इसकी भी अहमियत है। हरेक कर्मचारी आपसे इसकी आशा करता है। हर कर्मचारी चाहता है कि उसका ख़याल रखा जाये, उसकी तारीफ़ की जाये। जब वह अच्छा काम करता है, तो उसके कान बॉस के ‘शाबाश !’ सुनने को बेचैन रहते हैं। उसने काम कैसा किया है, वह इसकी प्रतिक्रिया भी चाहता है।

सूत्र-6
ध्यान कर्मचारियों पर केन्द्रित करें

कुछ मैनेजर पूरा ध्यान अपने लक्ष्य और काम पर ही केन्द्रित रखते हैं, तो दूसरी तरफ कुछ का ध्यान अपने कर्मचारियों पर ही रहता है। देखा गया है कि कर्माचारियों पर ध्यान केन्द्रित करने वाले मैनेजरों की उपलब्धियाँ ज़्यादा होती हैं। जो बॉस अपने सहयोगियों के काम में व्यक्तिगत रुचि लेते हैं, तो वहाँ का माहौल अच्छा रहता है। लोग अच्छा महसूस करते हैं और काम भी बढ़िया होता है। ज़ाहिर सी बात है, हम जिन्हें पसन्द करते हैं, उनके लिए काम करने में भी मन लगता है।.....यदि आप ऐसे बॉस हैं, जो अपने कर्मचारियों में कोई रुचि नहीं लेते, तो ज़रा आज से ही उनकी तरफ ध्यान देना शुरू करें और देखें उसका नतीजा।

सूत्र-7
व्यक्तिगत ध्यान रखें

हर कर्मचारी अपने से बड़े अधिकारियों का व्यक्तिगत ध्यान और सम्पर्क चाहता है। कर्मचारियों के कार्य-लक्ष्य, परेशानी, तनाव वगैरह में जो मैनेजर व्यक्तिगत रुचि लेता है, वहाँ कर्मचारी अच्छा काम करते हैं। कर्मचारियों की ज़रूरतों को टटोलें, उनके मन को छुएँ। यह मैनेजर के लिए महत्त्वपूर्ण है। आप कितने भी व्यस्त रहें, कर्मचारियों की अनदेखी न करें। आप खुद देखें कि आप उनकी अनदेखी कब से कर रहे हैं। आप अपने सभी सहयोगियों से दोस्ताना व्यवहार करें। उनके व्यक्तिगत सम्बन्धों और उनकी परेशानियों को जानें। उन्हें अपना दुःख-सुख बाँटने का मौक़ा दें।

सूत्र-8
लोगों से अन्तरंगता

जितना होना चाहिए, क्या आप अपने कर्मचारियों से उतने अन्तरंग हैं ? आपके बारे में वे क्या सोचते महसूस करते हैं, क्या आपको इसका एहसास है ? या काम के दबाव में आपका उनसे सम्पर्क टूट रहा है ? मैनेजरों के साथ ऐसा अक्सर जाने-अनजाने होता है। इससे पहले की वे जान पायें, कर्मचारी और उनके बीच एक दीवार खड़ी हो जाती है। इसके कारण को तलाश करें। ध्यान रहे, कर्मचारी आपकी सबसे महत्त्वपूर्ण पूँजी हैं। अगर आपका सम्पर्क उनसे छूटा, तो इसकी भरपाई नहीं हो सकेगी।

सूत्र-9
दोस्त बनें

हरेक से दोस्ताना व्यवहार रखिये। बरसों पहले की यह बात आज भी सही लगती है, भले सामान्य-सी लगे। अगर आप अपने सहयोगियों के साथ दोस्ताना बर्ताव करते हैं, तो वे भी ऐसा ही करेंगे। इस तरह काम भी वे बेहतर और ज़्यादा करेंगे। अच्छे परिणाम के लिए मित्रवत् व्यवहार के अलावा कोई चारा नहीं। दोस्त वही, जो आपकी भावनाओं को समझे, उसे ही आप पसन्द करते हैं। आप कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार रखते हैं, तो बेशक इसका फल अच्छा मिलेगा। बॉस से भी ढेरों ग़लतियाँ हो सकती हैं, खासकर व्यवहार के मामले में। वह किसी को पसन्द नहीं करते या कर्मचारियों की भावनाओं को नहीं समझ पाते। अगर आपके किसी दोस्त ने ग़लती कर दी, तो पहले आपको उससे मिलकर इसकी वजह जाननी चाहिए। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके बाद उससे ऐसी भूल-चूक कभी नहीं होगी। किसी भी ग़लती के लिए कर्मचारी को फौरन डाँटने-फटकारने से बचें। उससे दोस्ताना ढंग से ही व्यवहार करें।

सूत्र-10
ओह आप !

आपको कैसा लगेगा, जब कोई आपका नाम ही भूल जाये ? आपको बुरा लगेगा, लगेगा न ? अगर आपको किसी कर्मचारी का नाम याद नहीं आ रहा है, तो दिमाग़ पर ज़ोर दें। नाम याद रखें और इस्तेमाल में भी लायें। इससे यह पता लगता है कि आपको उनसे लगाव है। नाम की प्रशंसा भी करें, जैसे—आपका नाम बहुत अच्छा है, इसका अर्थ अच्छा है, भाषा का यह महत्त्वपूर्ण शब्द है, वगैरह।

सूत्र-11
आलसी और कामचोरों पर नजर...

किसी शिकारी की तरह उन पर नज़र रखें। कामचोर और आलसी कर्मचारी पूरे दफ़्तर का माहौल ख़राब करते हैं। अगर कोई एक मेज़ से उठा, तो देखा-देखी सभी ऐसा करने लगते हैं, इससे दफ़्तर का अनुशासन और कार्यक्षमता प्रभावित होती है। मैनेजर को चाहिए कि वह ऐसे कर्मचोरों पर कड़ी नज़र रखे। ऐसे लोगों को काम करने के प्रति प्रोत्साहित करे। यदि आपने ऐसा नहीं किया, तो दूसरे कर्मचारियों से काम करा पाने में दिक़्क़त होगी। बाद में सभी को सुधार पाना मुश्किल होगा। इसलिए ज़रूरी है कि पहले कामचोर को ही सुधारें। वरना वह दफ़्तर में असन्तोष और संकट का स्रोत बन जायेगा और बाकी लोग काहिल बन जायेंगे।

सूत्र-12
बेचिये

मैनेजर का सिर्फ़ एक ही काम नहीं है कि वह माल को बेचे। वह विचार भी बेचता है। ढंग, सलीक़ा भी बेचता है। वह कर्मचारियों के बीच स्पष्टता, सुरक्षा, नियमितता, ऊँची गुणवत्ता, उत्पादन में अच्छी भागीदारी जैसे विचारों को भी बेचता है। यह सारी ऐसी चीज़ें हैं, जिन्हें कोई सुपरवाइजर दिन-ब-दिन, साल-दर-साल बेचता है, जिससे लोग वैसा ही काम करें, जैसा वह चाहता है। कर्मचारी तभी जल्दी और अच्छा काम करते हैं। एक सेल्समैन की तरह आपको भी कर्मचारियों से बर्ताव करना है। आपको रचनात्मक विचार और ढंग बेचना है और कर्मचारियों को इन्हें लेने के लिए तैयार भी करना है। बेचते समय आपको यह भी ध्यान में रखना है कि दूसरे इसके बारे में क्या सोचते हैं, कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है और साथ ही इससे कम्पनी को कितना लाभ होगा।

सूत्र-13
कोई भी सौ फ़ीसदी सही नहीं होता

ग़लतियाँ और भूलें हम से भी हो जाया करती हैं। कभी हम अपनी छोटी-छोटी भूल पर ध्यान नहीं दे पाते, जैसे—पैंट का उटंग हो जाना या जूड़े को चिड़ियों का घोंसला बना लेना। यह हरगिज़ न सोचें कि यह ग़लती नहीं है; क्योंकि ऐसा आमतौर पर सभी के साथ होता है। कहा जाता है कि जिस दिन हम अपनी आलोचना बन्द कर देते हैं, यानी खुद को नहीं देख पाते, उस दिन से हमारा विकास रुक जाता है। यह ठीक है कि सौ फ़ीसदी सही कोई नहीं होता। कोई मानव-सम्बन्धों का विशेषज्ञ भी नहीं होता। लेकिन ऐसी ग़लतियों से अवश्य बचें, जिससे आपके कर्मचारियों पर ग़लत असर पड़े। आप कैसे बॉस हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि आपके कर्मचारी आपके बारे में क्या सोचते हैं। हम सभी अपनी कमियों को सुधार सकते हैं।

सूत्र-14
अगर आप सहमत नहीं हैं...

...तो कुछ न कहें। मुँह बन्द रखें। आपको अचम्भा होगा कि कैसे आपके सहयोगी आपको टोकते हैं कि आप उनकी बात से सहमत नहीं हो पा रहे हैं। आपको वह एक विचार बताते हैं। विचार या सुझाव बाद में फलने वाला पौधा होता है। अगर आज इसे दबा देते हैं, तो यह दुबारा नहीं पनप सकता। आप उनकी बात सुनें। हो सकता है कभी यह विचार आपकी समझ में आये और आप उसे मान भी लें।

सूत्र-15
जब आप कुछ भला न कहें....

कर्मचारियों के खुश रहने के लिए बुनियादी बात है—उनसे ज़्यादा न बोलना। आप अगर किसी कर्मचारी के विचार को पसन्द नहीं कर रहे, तो ज़्यादा शोर न मचाएँ। दिमाग़ पर ज़ोर दें। याद रखें, लोगों को अपने विचारों से पालतू बच्चे की तरह लगाव होता है। हंगामा क्यों करें, जबकि आप भी इसे समझ सकते हैं। उस वक्त कुछ न कहें; क्योंकि जब किसी को समर्थन नहीं मिल पाता, तो अक्सर ठीक लगने वाली बात जल्द ही नाकाम हो जाती है।

सूत्र-16
बार-बार की निगरानी

…औरों की तरह आपको भी यह अच्छा नहीं लगेगा कि कर्मचारी पर हर समय धौंस जमाई जाये और उनके बारे में न सोचा जाये। यह सामान्य सी बात है। लेकिन कुछ लोग, जो दफ़्तर चलाते हैं, वहां के फैसले करते हैं, जिन्हें कर्मचारियों को मनाना होता है। मैनेजर की ज़िम्मेदारी तो होती है है, लेकिन बार-बार छोटी-छोटी बातों के लिए कठोर बातें सुनना कर्मचारियों को अच्छा नहीं लगता। व्यवहार बनाये रखना है तो कमर्चारियों को समझें, उनसे अच्छा बर्ताव करें, वरना उनका व्यवहार भी आपके साथ ठीक नहीं रहेगा। क्या आप यह चाहेंगे ?

सूत्र-17
हर वक़्त बॉस न रहें

कुछ लोग, जो मैनेजर होते हैं और फैसले लेते हैं, बॉस तो होते हैं, लेकिन हर समय उनकी बात नहीं मानी जाती। जो अपनी बात मनवाना चाहते हैं, उन्हें लोग पसन्द नहीं करते। ऐसा बॉस परेशान रहता है। अच्छा बॉस अपने कर्मचारियों के साथ समान स्तर का व्यवहार करता है, उन्हें अपने से कमतर नहीं समझता। वह नहीं चाहेगा कि कोई कर्मचारी नौकरी के कारण अपनी ऊर्जा का स्वाभिमान निगल जाये। उसे चाहिए कि अपने अधिकार का इस्तेमाल वह कभी-कभी ही करे। कर्मचारियों की आज़ादी में दख़ल न दें, जब तक कि ज़रूरी न हो।

सूत्र-18
कड़ाई की भी ज़रूरत

आप अच्छे मैनेजर हैं, तो आपको कर्मचारियों के साथ थोड़ा सख़्त व्यवहार भी करना पड़ेगा। यह इनसानी फ़ितरत है। बार-बार प्रोत्साहित करने से ही समस्या का हल नहीं हो जाता। एक समस्या आज हल की, दूसरे दिन नयी खड़ी हो जायेगी। अगर आपने कर्मचारियों की एक माँग मान ली, तो दूसरे दिन वह और ज़्यादा माँगेंगे। एक अच्छा बॉस सभी चीज़ों को सिलसिलेवार लेता है। वह एक ही काम के पीछे नहीं लगा रहता। उसे कभी कड़ाई का भी पालन करना पड़ता है। वह हमेशा प्रोत्साहित नहीं करता। यही वजह है कि उसे इसका अच्छा परिणाम मिलता है।

अध्याय-2
कर्मचारियों को बढ़ावा दें

सूत्र-19
क्या वे ऊब रहे हैं

मान लें कि आपके दफ़्तर में एक तरफ़ लोग आगे बढ़ रहे हैं, तो दूसरे तरफ़ वह पिछड़ भी रहे हैं। अगर साल-दर-साल एक ही तरह काम करते हुए कर्मचारी ऊब जाते हैं, तो यह आश्चर्य की बात नहीं है। इससे उनमें असन्तोष पनपता है, जिससे काम का घाटा होता है। इससे बढ़कर कोई दूसरी चीज़ महत्त्वपूर्ण नहीं कि आप कर्मचारियों को खुश रखें। यह आप उन्हें सीखने और बढ़ने का मौका देकर कर सकते हैं। कर्मचारियों को ज़ोर देकर काम सिखाएँ। यही एक रास्ता है। किसी की मदद करना भी आपका महत्त्वपूर्ण काम है।

सूत्र-20
बुनियादी बात

कर्मचारी से व्यवहार करते वक़्त यह याद रखें कि कोई कितना भी छोटा हो, उसकी भी अपनी हैसियत है, स्वाभिमान है। वह चाहता है कि आप उसे मानें। अगर आप इस बुनियादी बात को समझते हैं, कर्मचारियों का ध्यान रखते हैं, तो आपके काम में कोई रुकावट नहीं आयेगी। दुर्भाग्य से ढेरों मैनेजर इसे नहीं मानते, तो कोई अचरज की बात नहीं कि वह हमेशा परेशानियों में रहें। एक अच्छा बॉस अपने अधिकारों को सहजता के साथ प्रदर्शित करता है। वह कर्मचारियों के बीच आपसी तालमेल रखता है, सम्मान करता है और बदले में सम्मान पाता भी है। उनके बीच टीमवर्क की भावना से व्यवहार करता है। वह खुद को ज़्यादा बड़ा नहीं समझता और दूसरे की हैसियत को मान्यता देता है।
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