Laal Kitab ke Achook Totake - A Hindi Book by - Bhuvaneshwar Prasad Verma - लाल किताब के अचूक टोटके - भुवनेश्वर प्रसाद वर्मा
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Laal Kitab ke Achook Totake

लाल किताब के अचूक टोटके

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भुवनेश्वर प्रसाद वर्मा<<आपका कार्ट
मूल्य$ 4.95  
प्रकाशकभगवती पॉकेट बुक्स
आईएसबीएन81-7775-007-0
प्रकाशितअप्रैल २७, १९९९
पुस्तक क्रं:1550
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Lal Kitab Ke Achook Totke--A Hindi Book -by Bhuvneshwar Prasad Varma

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

प्राक्कथन

भारत में ज्योतिर्विद्या की प्राचीनता असंदिग्ध है। ज्योतिर्विद्या के सहारे मनुष्य अपने भूत वर्तमान और भविष्य में घटित हुई या होनेवाली घटनाओं से अवगत होकर संकटों से त्राण के लिए सजग और सचेष्ट हो सकता है। मारक ग्रह की महादशा या अन्तर्दशा में शरीर पर होने वाले कष्टों से या मृत्युभय से छुटकारा पाने के लिए उचित जप, तप या टोटकों का सहारा ले सकता है। सन्तान प्राप्ति के लिए, भाग्योन्नति के लिए, धन प्राप्ति के लिए, सरकारी सेवा की प्राप्ति, सम्मान प्राप्ति तथा व्यवसाय वृद्धि और सफल-सुखी गार्हस्थ्य-दाम्पत्य जीवनयापन के लिए ज्योतिर्विदों की सलाह पर जातक बतलाये गये उपायों का अवलम्बन कर अभीष्ट सिद्धि कर सकता है। ज्योतिर्विद्या कोई ठग विद्या नहीं, वरन् वैज्ञानिक सिद्धान्तों और गणनाओं पर आधारित एक सद्विद्या है, जिसको संसार की विभिन्न सभ्यता और संस्कृतियों का समर्थन प्राप्त है। हम इसकी अवहेलना या उपेक्षा नहीं कर सकते। इस ज्योतिर्विद्या ने जीवन के अंधकार में भटकने वाले बहुत सारे जातकों का मार्गदर्शन किया है और उन्हें संकटापन्न स्थितियों से निकालकर सुखमय जीवनयापन करने की कला सिखलाई है।

वैसे भारतीय ज्योतिषशास्त्र वेद का एक अंग होने के नाते प्राचीनतम् विद्याओं में परिगणित है, पर इस हाल में कुछ ज्योतिर्विदों और ज्योतिषप्रेमी विद्वानों का ध्यान उर्दू, फारसी में लिखित ज्योतिषशास्त्र की एक अनुपम पुस्तक ‘‘लाल किताब’’ की ओर गया है। चूँकि यह पुस्तक उर्दू, फारसी में लिखित है, इसलिए सामान्य जनमानस की दृष्टि से यह बहुत दिनों तक ओझल रही, लेकिन कतिपय ज्योतिर्विदों के अनुसंधान के क्रम में यह पुस्तक प्रकाश में आई और कुछ प्रकाशकों ने इसके हिन्दी रूपान्तर प्रकाशित कर जनसाधारण का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया। तभी से इस पुस्तक को लेकर ज्योतिष-जगत में हलचल मची और इसका अध्ययन-विवेचन प्रारम्भ हो गया।

‘लाल किताब’ ज्योतिर्विद्या की एक स्वतन्त्र और मौलिक सिद्धान्तों पर आधारित एक अनोखी पुस्तक है। इसकी कुछ अपनी निजी विशेषताएँ हैं, जो अन्य सैद्धान्तिक अथवा प्रायोगिक फलित ज्योतिष-ग्रन्थों से हटकर हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ग्रहों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए जातक को ‘टोटकों’ का सहारा लेने का संदेश देना है। ये टोटके इतने सरल हैं कि कोई भी जातक इनका सुविधापूर्वक सहारा लेकर अपना कल्याण कर सकता है। काला कुत्ता पालना, कौओं को खिलाना, क्वाँरी कन्याओं से आशीर्वाद लेना, किसी वृक्ष विशेष को जलार्पण करना, कुछ अन्न या सिक्के पानी में बहाना, चोटी रखना, सिर ढँक कर रखना इत्यादि । ऐसे कुछ टोटकों के नमूने हैं, जिनके अवलम्बन से जातक ग्रहों के अनिष्टकारी प्रभावों से अनायास की बचा जाता है। कीमती ग्रह रत्नों (मूंगा, मोती, पुखराज, नीलम, हीरा आदि। में हजारों रुपयों का खर्च करने के बजाय जातक इन टोटकों के सहारे बिना किसी खर्च के (मुफ्त में) या अत्यल्प खर्च द्वारा ग्रहों के दुष्प्रभावों से अपनी रक्षा कर सकता है।

‘लाल किताब’ में धर्माचरण और सदाचरण के बल पर ग्रह दोष निवारण का झण्डा ऊँचा किया है, जिससे हमारा इहलोक तो बनेगा ही, परलोक भी बनेगा। सदाचरण द्वारा ग्रह दोष निवारण पर मैंने कई लेख लिखे थे और उसका प्रकाशक ज्योतिषीय पत्र-पत्रिकाओं में हुआ था। बाद में मेरा विचार हुआ कि ‘लाल किताब’ पर आधारित अन्यान्य टोटकों पर भी एक सांगोपांग पुस्तक सर्वसाधारण जन समुदाय के उपकारार्थ लिखूँ।

‘लाल किताब’ में विभिन्न प्रकार के ग्रह दोषों से बचाव के लिए सैकड़ों टोटकों का विधान है। जीवन का कोई ऐसा पक्ष नहीं है, जिससे संबंधित टोटके न बतलाये गये हों। पर इस छोटी सी पुस्तक में और इस अल्पावधि में उन सबों का विवेचन सम्भव नहीं हो सका है। जो मुख्य विषय हैं- जन्मकुण्डली गत ग्रहों के दुष्प्रभाव और उनसे बचने के टोटके, इसी को इस पुस्तक में प्रमुखता दी गयी है। विषय को स्पष्ट करने के लिए ज्योतिर्विद्या के मूल भूत सिद्धान्तों, जैसे-ग्रहों का परिचय, ग्रहों पर पारस्परित संबंध, ग्रहों के दुष्प्रभाव की स्थितियाँ आदि का प्रारम्भ उल्लेख कर दिया गया है। इससे साधारण पाठकों को भी ज्योतिर्विद्या के प्रति अभिरुचि जगेगी और वे स्वयं ग्रहों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए टोटकों का चयन कर लाभ उठा सकेंगे।

इस पुस्तक की सार्थकता और उपादेयता स्वयंसिद्ध है। इससे पाठकों का, प्रभावित जातकों का निश्चय ही उपकार और कल्याण होगा, ,ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।
इस पुस्तक की पाण्डुलिपि तैयार करने में मेरी पौत्री सुश्री श्वेता रानी ने काफी सहयोग प्रदान किया, इसके लिए वह धन्यवादार्ह है। पुस्तक को प्रकाशित करने की दिशा में ‘भगवती पॉकेट बुक्स’ आगरा के श्री राजीव अग्रवाल जी ने जो दिलचस्पी दिखलाई और सुन्दर साजसज्जा के साथ इसका मुद्रण करवाया इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र तो हैं ही, साथ ही ज्योतिर्जगत् में इसके माध्यम से अपनी कीर्ति पताका फहरायेंगे और सुयश के भागी होंगे, ऐसा मेरा विश्वास है।

भुवनेश्वर प्रसाद वर्मा ‘कमल’

भूमिका


ज्योतिषशास्त्र बड़ा ही गहन और विशद् है। इसका जितना विस्तार है, उतनी ही गहराई भी। इसके विस्तार क्षेत्र में बहुत हद तक हस्त सामुद्रिकशास्त्र तथा कुछ हद तक तंत्रशास्त्र भी आता है। सृष्टि के आदिकाल में ही ज्योतिर्विद्या का प्रादुर्भाव हुआ और मंत्रद्रष्टा ऋषियों ने वेदों में इसका उल्लेख किया। ज्योतिर्विद्या वेदों का एक प्रमुख अंग है। कालान्तर में इसका निरन्तर विकास होता गया और भारतीय ज्योतिषशास्त्र के साथ-साथ पाश्चात्य जगत् में इस विषय पर गहन गम्भीर चिन्तन, मनन और अध्ययन हुआ। फलत: ज्योतिर्विद्या के अनेक शाखाएँ हो गयीं। यूरोप, अरब, यूनानवासियों ने अपने ढंग से इस विषय अर अनुसंधान किये और अपने-अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किये। फिर भी उन सबों की मूल भावधारा एक रही तथा ग्रहों के स्वरूप, आकार-प्रकार, गति, प्रभाव, आदि में कोई अन्तर नहीं आया।

‘लाल किताब’ ज्योतिषशास्त्र की अनुपम पुस्तक है। यह उर्दू-फारसी में लिखी गई है, पर इसके लेखक अब तक अज्ञात ही रहे हैं। उर्दू फारसी में लिखित होने पर भी यह पूर्णत: भारतीय संस्कृति से अनुबद्ध है और भारतीय समाज खासकर हिन्दू समाज की परम्पराओं पर आधारित है। इसमें भारतीय शिष्टाचार के साथ पूजा पाठ आदि को अत्यधिक महत्त्व दिया गया है। ‘लाल किताब’ की इन सब विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हुए हम नि:संकोच कह सकते हैं कि यह किसी हिन्दू अथवा ब्राह्मण धर्मावलम्बी ज्योतिर्विद की कृति है। यह पुस्तक उर्दू-फारसीमें क्यों लिखी गयी इसका एक मात्र उत्तर यही दिया जा सकता है कि भारत में मुस्लिम शासनकाल की स्थापना हो चुकी थीऔर उर्दू पारसी को यहाँ की राजभाषा घोषित किये जाने के बाद बहुतेरे भारतवासियों की मातृभाषा उर्दू हो चुकी थी, तभी किसी उर्दू-फारसी भाषाविद् भारतीय विद्वान ने इस पुस्तक की रचना की होगी। ‘लाल किताब’ के उर्दू-फारसी में लिखित होने के कारणों में इसे भारत के बाहर ईरान ईराक आदि अरब देशों में रचित होने की कल्पना करना महामूर्खता होगी, क्योंकि इस पुस्तक के रग-रग में भारतीय संस्कृति की गंध समाई हुई है।

‘लाल किताब’ नामकरण की सार्थकता को सिद्ध करने के लिए हमें बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेंगी। ‘किताब’ शब्द अरबी भाषा का एक शब्द है, जिसकी व्युत्पत्ति ‘कतब’ (लिखना) धातु से हुई है। उर्दू, फारसी, अरबी आदि भाषाओं में ग्रंथ के लिए इसी शब्द का प्रयोग किया जाता है। ‘लाल’ रंग वर्जन का वाचक शब्द है। ‘लाल झण्डा’ खतरे के आगमन का प्रतीक है। अत: ‘लाल किताब’ को लक्ष्यार्थ हुआ वह ग्रंथ जिसमें बहुत सारी वर्जनाएँ हैं जातकों के लिए- यह न करो (यह करो), वह न करो, तभी कल्याण होगा अथवा यह ग्रह तुम्हारे लिए अनिष्टकारी है, खतरनाक है उसके लिए यह उपाय करो, वह उपाय करो इत्यादि।

‘लाल किताब’ की सबसे बड़ी विशेषता है, परम्परागत ढंग से निर्मित जन्मकुण्डली को फलादेश और उपाय के लिए अपने सिद्धान्तों के अनुरूप बदल लेना (परिणत कर लेना) और तब तक उसका ग्रहों की स्थिति के अनुकूल फलादेश करना तथा शान्त्यर्थ टोटके बतलाना। परम्परागत ज्योतिषीय पद्धति से निर्मित जन्मकुण्डली के अनुसार टोटकों का प्रयोग निष्फल होगा, इस बात को हमेशा ध्यान में रखना है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि आप ग्रहों के अनिष्टकारी प्रभाव से बचने के लिए ‘लाल किताब’ के विशेषज्ञ ज्योतिषी से मिलकर ही परामर्श करें। अगर स्वयं इन टोटकों का प्रयोग करना चाहते हैं, तो इस पुस्तक (लाल किताब के अचूक टोटके) को पढ़कर जन्मकुण्डली बनाने या परम्परागत ढंग से बनी हुई जन्मकुण्डली को लाल किताब के सिद्धान्तों  के अनुसार परिवर्तित करने की पद्धति से अवगत हो लें, तभी इसमें बतलाये गये टोटकों का प्रयोग करें।

‘टोटको’ अंग्रेजी के Totem शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। विश्व के विभिन्न समाजों में, विभिन्न जातियों और धर्मावलम्बियों में किसी प्रकार के अनिष्ट निवारण के लिए प्राचीन काल से ‘टोटका’ का सहारा लिया जाता रहा है। यह आज भी उसी रूप में जीवित है। अंग्रेज लोग 13 अंक को अशुभ मानते हैं और होटलों के 13 नम्बर के कमरे में नहीं ठहरते। घर के बीचोंबीच छत में लगे ‘धरन’ (कड़ी) के नीचे नहीं सोते। हिन्दू लोग बिल्ली के रास्ता काटने या यात्रा के समय छींक होने से यात्रा स्थगित कर देते हैं। इसी प्रकार कष्टों या संकटों के निवारणार्थ अनेक प्रकार के उपायों का अवलम्बन करते हैं। गंडा, ताबीज, झाड़-फूँक, मंत्र, तंत्र आदि ऐसे ही ‘टोटके’ है। इन पर लोगों की बेहद आस्था है। इस आस्था का मुख्य कारण इन ‘टोटकों’ का प्रभावी और असरदार होना है। अत: इसे अंधविश्वास कहकर टाल नहीं सकते। प्रयोगात्मक अध्ययन में मैंने इन टोटकों के द्वारा बहुतों का कल्याण देखा है।

‘लाल किताब’ की एक और विशेषता उसकी धार्मिकता है। ग्रह दोष निवारण के लिए बहुत तरह के ‘टोटकों’ का विधान करने के साथ ही इसमें पूजा-पाठ, देवी-देवताओं के अस्तित्व और सदाचरण पर भी बल दिया है। इसका विश्वास है कि हम अपने मनोविकारों के दूर कर बड़ों के प्रति श्रद्धाभक्ति, सेवाभावना के बल पर उनके आशीर्वाद मात्र से ग्रह-संकटों से बच सकते हैं। पशुओं (गाय, भैंस, कुत्ता आदि), पक्षियों (तोता, कौआ आदि) की सेवा और क्वाँरी कन्याओं को मातृवत् मानकर भी ग्रह के अनिष्टों का निवारण किया जा सकता है। दान, परोपकार, सच्चरित्रता आदि के द्वारा तथा नशीले पदार्थों के परित्याग के द्वारा भी ग्रह दोष निवारण सम्भव है।

इस पुस्तक को उपयोगी तथा सर्वसाधारण पाठकों के लिए सुगम बनाने के लिए सभी आवश्यक तथ्यों का विवेचन कर दिया गया है। वैसे जैसा मैंने पहले बतलाया है, ज्योतिष्शास्त्र एक अथाह विद्या है और इस छोटे से ग्रंथ में उस विद्या के सभी पक्षों का विवेचन न तो सम्भव है और न ही आवश्यक। हमारा तो उद्देश्य था कि कम से कम पृष्ठों में ‘लाल किताब’ में बतलाये गये ग्रहों के अनिष्टकारी प्रभावों से बचने के लिए जातकों को किन-किन टोटकों का सहारा लेना चाहिए, यह पाठकों को बतला दिया जाये। इसमें हमें कितनी सफलता मिली है, इसका निर्णय सुविज्ञ पाठकगण करने के अधिकारी है।

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