439 Mahapap se Bacho - A Hindi Book by - Swami Ramsukhadas - महापाप से बचो - स्वामी रामसुखदास
Hindi / English

शब्द का अर्थ खोजें

पुस्तक विषय
नई पुस्तकें
कहानी संग्रह
कविता संग्रह
उपन्यास
नाटक-एकाँकी
लेख-निबंध
हास्य-व्यंग्य
व्यवहारिक मार्गदर्शिका
गजलें और शायरी
संस्मरण
बाल एवं युवा साहित्य
जीवनी/आत्मकथा
यात्रा वृत्तांत
भाषा एवं साहित्य
प्रवासी लेखक
संस्कृति
धर्म एवं दर्शन
नारी विमर्श
कला-संगीत
स्वास्थ्य-चिकित्सा
योग
बोलती पुस्तकें
इतिहास और राजनीति
खाना खजाना
कोश-संग्रह
अर्थशास्त्र
वास्तु एवं ज्योतिष
सिनेमा एवं मनोरंजन
विविध
पर्यावरण एवं विज्ञान
पत्र एवं पत्रकारिता
ई-पुस्तकें
अन्य भाषा

मूल्य रहित पुस्तकें
सुमन
चन्द्रकान्ता
कृपया दायें चलिए
प्रेम पूर्णिमा
हिन्दी व्याकरण

अगस्त ०३, २०१४
पुस्तकें भेजने का खर्च
पुस्तकें भेजने के सामान्य डाक खर्च की जानकारी
आगे
439 Mahapap se Bacho

महापाप से बचो

<<खरीदें
स्वामी रामसुखदास<<आपका कार्ट
मूल्य$ 1  
प्रकाशकगीताप्रेस गोरखपुर
आईएसबीएन81-293-0787-1
प्रकाशितजनवरी ०१, २००६
पुस्तक क्रं:1125
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Mahapap Se Bacho-A Hindi Book by Swami Ramsukhdas - महापाप से बचो - स्वामी रामसुखदास

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

(संवर्धित संस्करण)

ब्रह्महत्या सुरापानं स्तेयं गुर्वंग्नागम:।
महान्ति पातकान्याहु: संसर्गश्चापि तै: सह।।

(मनुस्मृति 11/54)

‘ब्राह्मण की हत्या करना, मदिरा पीना, स्वर्ण आदि की चोरी करना और गुरुपत्नी के साथ व्यभिचार करना- ये चार महापाप हैं। इन चारों में किसी भी महापाप को करने वाले के साथ कोई तीन वर्ष तक रहता है, उसको भी फल मिलता है, जो महापापी को मिलता है।’*

1.ब्रह्महत्या


चारों वर्णों का गुरु ब्राह्मण है- ‘वर्णानां ब्राह्मणो गुरु:’; शास्त्रीय ज्ञान का जितना प्रकाश ब्राह्मण-जाति से
...................................................................
*स्तेनो हिरण्य सुरां पिबँश्च गुरोस्तल्पमावसन्ब्रह्महा चैते पतन्ति चत्वार: पंचमश्चाचरँस्तैरति।।
(छान्दोग्य.5/10/9)

हुआ है, उतना और किसी जाति से नहीं हुआ है। अत: ब्राह्मण की हत्या करना महापाप है। इसी तरह जिससे दुनिया का हित होता है, ऐसे हितकारी पुरुषों को, भगवद्भक्त को तथा गाय आदि को मारना भी महापाप ही है। कारण कि जिसके द्वारा दूसरों का जितना अधिक हित होता है, उसकी हत्या से उतना ही अधिक पाप लगता है।

2.मदिरापान


मांस, अण्डा, सुल्फा, भाँग आदि सभी अशुद्ध और नशा करने वाले पदार्थों का सेवन करना पाप है; परन्तु मदिरा पीना महापाप है। कारण कि मनुष्य के भीतर जो धार्मिक भावनाएँ रहती हैं, धर्म की रुचि, संस्कार रहते हैं, उनको मदिरापान नष्ट कर देता है। इससे मनुष्य महान् पतन की तरफ चला जाता है।
 
मुख्र्य पृष्ठ  

No reviews for this book..
Review Form
Your Name
Last Name
Email Address
Review
 

   

पुस्तक खोजें

चर्चित पुस्तकें


मेरा दावा है
    सुधा ओम ढींगरा

धूप से रूठी चाँदनी
    सुधा ओम ढींगरा

कौन सी जमीन अपनी
    सुधा ओम ढींगरा

  आगे

समाचार और सूचनाऍ

अगस्त ०३, २०१४
हमारे संग्रह में ई पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। कुछ ई-पुस्तकें यहाँ देखें।
आगे...

Font :