Ek Nayi Baat-A Hindi Book by Swami Ramsukhdas - एक नयी बात स्वामी रामसुखदास
प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश
जिससे क्रिया की सिद्धि होती है, जो क्रिया को उत्पन्न करनेवाला है, उसको
‘कारक’ कहते हैं। कारकों में कर्ता मुख्य होता है; क्योंकि सब
क्रियाएं कर्ता के अधीन होती हैं। अन्य कारक तो क्रिया की सिद्धि में
सहायक होते हैं, पर कर्ता स्वतन्त्र होता है। कर्ता में चेतन का आभास होता
है; परन्तु वास्तव में चेतन कर्ता नहीं होता। इसलिये गीता में जहाँ भगवान्
ने कर्ममात्र की सिद्धि में अधिष्ठान, कर्ता, कारण, चेष्टा और
दैव—ये पाँच हेतु बताये हैं, वहाँ शुद्ध आत्मा (चेतन)-को कर्ता
माननेवाले की निन्दा की है—
‘ऐसे पाँच हेतुओं के होनेपर जो भी कर्मों के विषय में केवल
(शुद्ध)
आत्मा को कर्ता देखता है, वह दुष्ट बुद्धिवाला ठीक नहीं देखता; क्योंकि
उसकी बुद्धि शुद्ध नहीं है अर्थात् उसने विवेक को महत्त्व नहीं दिया
है।’
गीता में भगवान् ने कहीं प्रकृति को, कहीं गुणों को और कहीं इन्द्रियों को
कर्ता बताया है। प्रकृति का कार्य गुण है, और गुणों का कार्य इन्द्रियाँ
हैं। अतः वास्तव में कर्तृत्व नहीं है। भगवान् ने कहा है—