1441 Sansar ka Asar Kaise Chhute - A Hindi Book by - Swami Ramsukhadas - संसार का असर कैसे छूटे - स्वामी रामसुखदास
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1441 Sansar ka Asar Kaise Chhute

संसार का असर कैसे छूटे

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स्वामी रामसुखदास<<आपका कार्ट
मूल्य$1  
प्रकाशकगीताप्रेस गोरखपुर
आईएसबीएन00000
प्रकाशितदिसम्बर ०३, २००५
पुस्तक क्रं:1092
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Sansar Ka Asar Kaise Chhoote-A Hindi Book by Swami Ramsukhdas - संसार का असर कैसे छूटे - स्वामी रामसुखदास

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

।।श्रीहरि:।।

संसार का असर कैसे छूटे ?

साधकों की प्राय: यह शिकायत रहती है कि यह जानते हुए भी कि संसार की कोई भी वस्तु अपनी नहीं है, जब कोई वस्तु सामने आती है तो उसका असर पड़ जाता है। इस विषय में दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। एक बात तो यह है कि असर पड़े तो परवाह मत करो अर्थात् उसकी उपेक्षा कर दो। न तो उसको अच्छा समझो, न बुरा समझो। न उसके बने रहने की इच्छा करो, न मिटने की इच्छा करो। उससे उदासीन हो जाओ। दूसरी बात यह है कि असर वास्तव में मन-बुद्धि पर पड़ता है, आप पर नहीं पड़ता। अत: उसको अपने में मत मानो। किसी वस्तु से राग होने पर भी संबंध जुड़ता है। भगवान् श्रीराम वन में गये तो उनके साथ जिन ऋषि-मुनियों ने स्नेह किया, उनका उद्धार हो गया और जिन राक्षसों ने द्वेष किया, उनका भी उद्धार हो गया, पर जिन्होंने राग किया, न द्वेष किया, उनका उद्धार नहीं हुआ; क्योंकि उनका संबंध भगवान् के साथ नहीं जुड़ा इसी तरह संसार का असर मन में पड़े तो उसमें राग-द्वेष करके उसके साथ अपना संबंध मत जोड़ो। आप भगवान् के भजन-साधन में लगे रहो। संसार का असर हो जाये तो होता रहे, अपना उससे कोई मतलब नहीं-इस तरह उसकी उपेक्षा कर दो।

जैसे आप कुत्ते के मन के साथ अपना कोई संबंध नहीं मानते, ऐसे ही अपने मन के साथ भी अपना कोई संबंध मत मानो। कुत्ते का मन और आपका मन एक ही जाति के हैं। जब कुत्ते का मन आपका नहीं है तो यह मन भी आपका नहीं है। मन जड़ प्रकृति का कार्य है, आप चेतन परमात्मा के अंश हो। जैसे कुत्ते के मन में संसार का असर पड़ने से आप में कोई फर्क नहीं पड़ता, ऐसे ही इस मन का भी आप में कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिये।  


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