Aage Andhi Gali Hai - A Hindi Book by - Prabhash Joshi - आगे अन्धी गली है - प्रभाष जोशी
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Aage Andhi Gali Hai

आगे अन्धी गली है

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प्रभाष जोशी<<आपका कार्ट
मूल्य$ 22.95  
प्रकाशकराजकमल प्रकाशन
आईएसबीएन9788126719402
प्रकाशितजनवरी ०१, २०१०
पुस्तक क्रं:7994
मुखपृष्ठ:सजिल्द

सारांश:
Aage Andhi Gali Hai - A Hindi Book - by Prabhash Joshi

‘आगे अन्धी गली है’ में विख्यात पत्रकार प्रभाष जोशी द्वारा ‘प्रथम प्रवक्ता’ और ‘तहलका’ में छपे कॉलम संकलित हैं।

प्रभाष जोशी ने हिन्दी पत्रकारिता में कॉलम लेखन को एक नया रूप देने के साथ ही उसे विविधता भी प्रदान की। ‘जनसत्ता’ में लिखे उनके कॉलम ‘कागद कारे’ के समानान्तर ‘प्रथम प्रवक्ता’ का कॉलम ‘लाग लपेट’ तथा ‘तहलका’ का ‘शून्य काल’ भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। ‘कागद कारे’ में प्रभाष जी ने अपनी संवेदना के आधार पर समय को परिभाषित किया है जबकि ‘लाग लपेट’ और ‘शून्य काल’ में अपने गांधीवादी विचार और तर्क से समकालीन परिदृश्य की पहचान निश्चित की है।

इस पुस्तक में प्रभाष जोशी के अन्तिम दो वर्षों का लेखन संकलित है। पुस्तक की भूमिका में प्रभाष जोशी की जिन्दगी के अन्तिम छह दिनों का संवेदनात्मक वृत्तांत भी दिया गया है। जीवन के अन्तिम सप्ताह में प्रभाष जोशी अपने लेखन, सामाजिक सक्रियता और विसंगतियों के विरुद्ध व्याख्यान की घुमंतू दिनचर्या में बेहद व्यस्त थे। पुस्तक के सम्पादकीय में उनका क्रमशः ब्यौरा दिया गया है। भागमभाग के बीच भी क्रिकेट से दीवानगी की हद तक उनका लगाव हमें आश्चर्य से भर देता है।

यह पुस्तक प्रभाष जी के अन्तिम दिनों के वैचारिक मानस को समझने की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
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