Amartya Sen - A Hindi Book by - Babita - अमर्त्य सेन - बबीता
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Amartya Sen

अमर्त्य सेन

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प्रकाशकइतिहास शोध-संस्थान
आईएसबीएन00000
प्रकाशितजून ०१, २००५
पुस्तक क्रं:6242
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Amartya Sen-A Hindi Book Babita -अमर्त्य सेन - बबीता

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

अमर्त्य सेन का जीवन


अपनी किस्मत को स्वयं रचने वाले कुछ लोगों में से एक नाम अमर्त्य सेन का भी है। उन्हें नॉबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उनका सारा जीवन अनेक विश्वविद्यालयों में अध्ययन करते हुए गुजरा है। उनके पूर्वजों का घर ढाका में है। उनके पिताजी आशुतोष सेन, ढाका विश्वविद्यालय में रसायनशास्त्र के अध्यापक थे। अमर्त्य सेन का जन्म 3 नवंबर, 1933 को शान्ति निकेतन (रविन्द्र नाथ टैगोर, विश्व-भारती) परिसर में हुआ था। उनके दादा जी क्षिती मोहन सेन संस्कृत के अध्यापक थे। उनकी माता अमिता सेन वहाँ पर छात्रा थी।

अपने जीवन के कुछ वर्ष उन्होंने मांडले (बर्मा में स्थित) में बिताए। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा ढाका में हुई। सेंट जार्ज स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे टैगोर स्कूल (शांति निकेतन) में दाखिल हो गए। इसी स्कूल में अर्थशास्त्री, अमर्त्य सेन का जन्म हुआ था। अमर्त्यसेन शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे थे। वे कुछ प्रमुख विषयों, जैसे संस्कृत, गणित, और भौतिक विज्ञान में निपुण थे। बाद में उन्होंने अपने प्रिय विषय अर्थशास्त्र में अपनी रुचि बढ़ाई, जिसके कारण आज उनकी विश्वभर में एक अलग पहचान है।
 
अमर्त्य सेन ने अपनी जिंदगी में कई ऐसी घटनाएँ देखीं जिनका उन पर गहर प्रभाव पड़ा। एक बार, अपने बचपन में उन्होंने एक ऐसी घटना देखी, जहाँ कुछ निर्दयी लोगों ने एक मासूम आदमी की जान ले ली थी। यह बात उन दिनों की हैं, जब वे ढाका में रहते थे। एक आदमी कुछ पैसों के लिए काम ढूंढ़ने आया था जिससे वह अपना और अपने परिवार का पेट भर सके। उसे कुछ लोगों ने चाकू से मार दिया, क्योंकि वहाँ साम्प्रदायिक दंगे भड़के हुए थे।  

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