Divya Surya Kiran Evam Rang Chikitsa - A Hindi Book by - Hari Om Gupta - दिव्य सूर्य किरण एवं रंग चिकित्सा - हरी ओम गुप्ता
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Divya Surya Kiran Evam Rang Chikitsa

दिव्य सूर्य किरण एवं रंग चिकित्सा

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मूल्य$ 5.95  
प्रकाशकडायमंड पॉकेट बुक्स
आईएसबीएन81-288-1693-4
प्रकाशितजनवरी ०१, २००७
पुस्तक क्रं:5629
मुखपृष्ठ:अजिल्द

सारांश:
Divya Soorya Kiran Evam Rang Chikitsa

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश


सूर्य चिकित्सा एक बहुत पुरानी प्राकृतिक रासायनिक तत्त्वों वाली चिकित्सा है। सूर्य स्नान, सतरंगी किरणों के सातो रंग, लाल, हरे एवं नीले रंगों के गुण ही इस चिकित्सा की मुख्य विशेषताएँ हैं। सूर्य की किरणें एवं इसके सात रंगों द्वारा हमारे शरीर को लाभ देने की उत्तम एवं लाभकारी तकनीक है। सूर्य की किरणों के सातों रंग हरेक रोग में सफल इलाज के अतिरिक्त रोगी को तंदुरस्ती प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसीलिए ‘क्रोमोपैथी’ हानिरहित, बिना लागत, प्राकृतिक रासायनिक तत्त्व सूर्य देव के अमूल्य आशीर्वाद से सुसज्जित है। इस पुस्तक में सूर्य चिकित्सा द्वारा आसान तरीके से विभिन्न रोगों के उपचार बताए गए हैं। एक साधारण व्यक्ति भी इस निःशुल्क चिकित्सा से लाभ प्राप्त कर सकता है।

दिव्य सूर्य किरण चिकित्सा एवं इसका महत्व


महर्षि चरक जी आयुर्वेद के मर्मज्ञ ज्ञानी थे। इसके अलावा वह सभी शास्त्रों के ज्ञाता थे। उन्होंने सूर्य किरण तथा रंग चिकित्सा का बड़ी ही विस्तार से वर्णन किया है। उन्हीं के आशीर्वाद से उनका दर्शन, विचार, सांख्य दर्शन ही हमारा प्रतिनिधित्व करता है।
बहुत से रोगों का इलाज खान-पान से जैसे अंकुरित चना, ताजे फल, हरी सब्जियां लेने से ही हो जाता है। चिकने और मसालेदार वस्तुओं को अपने भोजन में से हटा देने से, विश्राम, व्यायाम (टहलना), विशेष व्यायाम जैसे व्यायाम आदि करने से तथा वायु परिवर्तन आदि से हो जाता है। मेरा तो एक ही फर्ज है कि रोगी को पीड़ा से मुक्ति मिले। रोग दूर हों व हर मनुष्य सुखी जीवन जी सकें।
इस किताब को लिखने का उद्देश्य केवल रोगियों को निरोगी बनाने का ही है तथा समाज के कल्याण के लिए सूर्य किरण और रंग चिकित्सा के बारे में जाग्रत करना है।

हरि ओम गुप्ता

1

सूर्य किरण और रंग चिकित्सा

क्रोमोपैथी क्या है ?

सूर्य किरण और रंग चिकित्सा एक पुरानी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है। जिसके अन्तर्गत आयुर्वेद पद्धति के मूल सिद्धान्त वात, पित्त तथा कफ की तरह ही शरीर में रंगों के घटने-बढ़ने से रोगों की उत्पत्ति मानी गई है। रोग ज्ञात होने पर जिस रंग की शरीर में कमी हो उस रंग के पूर्ण हो जाने पर रोगों से छुटकारा पाया जाता है। इन रंगों की उत्पत्ति के मूल स्रोत भगवान सूर्य स्वयं हैं। सूर्य की तेजस्वनी किरणें भिन्न-भिन्न रंगों को लिये हुए होती हैं। जिनको उसी रंग की पारदर्शी बोतलों में जल के द्वारा अवशोषित किया जाता है।
जिस रंग की बोतल होती है उसमें भरे जल में सूर्य की किरणें उसी रंग के चिकित्सकीय गुण छोड़ देती है। जिसके कारण वह जल साधारण चल न होकर एक औषधि के रूप में तैयार हो जाता है। यद्यपि यह जल दिखने में साधारण ही लगता है परन्तु जिस रंग की बोतल में यह सूर्य की रोशनी में चार्ज किया हुआ होता है उस रंग के पूर्ण चिकित्सकीय गुण इसमें समाहित होते हैं।
यह चिकित्सा सभी जगह सुलभ व निःशुल्क प्राप्त होती है। जिसके प्राप्त करने में किसी भी व्यक्ति को कोई कठिनाई नहीं होती है। इस चिकित्सा से असाधारण से असाधारण रोग भी ठीक किए जा सकते हैं। इसके लिए रोगी को अपने मनोबल और चिकित्सा पर विश्वास कायम रखना चाहिए।

सूर्य किरण और रंग चिकित्सा (क्रोमोथेरेपी) की उपयोगिता


महर्षि आचार्य चरक के अनुसार जिस संगति में सभी औषधियाँ एक संग रहती हैं वह सूर्य किरण और रंग चिकित्सा ही है। इस पद्धति की औषधियों के माध्यम से सभी रोगों से बड़ी आसानी से मुक्ति मिल जाती है।
1. सूर्य किरण और रंग चिकित्सा के माध्यम से औषधि बनाने की विधि एकदम सरल है। उसी प्रकार सूर्य तप्त तथा सूर्य चार्ज से बनने वाली औषधियों को बनाने की विधि भी एकदम सरल है।
2. इस पद्धति से उपचार करते समय न तो दर्द होता है और न किसी प्रकार का कोई कष्ट होता है ।
3. सूर्य किरण और रंग चिकित्सा के माध्यम से इस पद्धति में जहरीला प्रयोग नहीं होता और न ही बुरा प्रभाव (रियैक्शन) पड़ता है।
4. इस पद्धति में बेहोश करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और न ही चीर-फाड़ करने की आवश्यकता होती है।
5. उसी प्रकार जख्म और घाव का निशान तक नहीं पड़ता है। सूर्य की किरणों में रोगों को नष्ट करने की विशेष क्षमता होती है।

सूर्य किरणों में सात रंगों के गुण


1. बैगनी (Violet):

शीतल, लाल कणों का वर्धक, क्षय रोग का नाशक है तथा विविधता का प्रतीक है।

2. गहरा नीला (Indigo) :

शीतल, पित्त रोगों का नाशक, ज्वर नाशक तथा शान्ति प्रदान करने वाला है। सूर्य शरीर को निरोगिता प्रदान करता है।

3. आसमानी (Blue) :

शीतल, पित्त रोगों का नाशक तथा ज्वरनाशक, आशा का प्रतीक होता है।

4. हरा (Green) :

समृद्धि और बुद्धि का प्रतीक है। समशीतोष्ण, वात रोगों का नाशक और रक्त शोधक है। ताजगी, उत्साह, स्फूर्ति और शीतलता का प्रतीक होता है।

5. पीला (Yellow) :

यश तथा बुद्धि का प्रतीक होता है। ऊष्ण, कफ, रोगों का नाशक, हृदय और पेट रोगों नाशक होता है। संयम, आदर्श, परोपकार का प्रतीक होता है।

6. नारंगी (Orange) :

आरोग्य तथा बुद्धि का प्रतीक है। ऊष्ण, कफ रोगों का नाशक मानसिक रोगों में शक्तिवर्धक है तथा दैवी महत्वाकांक्षा का प्रतीक होता है।

7. लाल (Red) :

प्रेम भावना का प्रतीक होता है। अति गर्म, कफ रोगों का नाशक, उत्तेजना देने वाला और केवल मालिश के लिए उत्तम होता है।
आप की गाड़ी में हीटर पर लाल एवं ठंडक पर नीला निशान क्यों ? जी है, यह क्रोमोपैथी ही है।

रंग के तीन परिवारों का महत्त्व


1. पीला, नारंगी लाल—इन तीनों रंगों में से नारंगी रंग ही ठीक रहता है।
2. हरा रंग—यह रंग शीतोष्ण होने के कारण सबसे उत्तम होता है।
3. बैंगनी रंग, गहरा नीला रंग और आसमानी नीला रंग इन तीन रंगों में गहरा नीला रंग ही ठीक रहता है।

2.

रोगी के दोष के अनुसार रंगों द्वारा चिकित्सा

नीले रंग के गुण धर्म


पित्त दोषों में शरीर में गर्मी बढ़ जाती है। इसका सन्तुलन नीले रंग की ठंडक देने वाला सूर्य तप्त नीले पानी और सूर्य चार्ज वायु आदि से होता है। यह हर प्रकार के पित्त जन्य प्रधान रोगों को दूर करता है तथा शान्तिवर्धक है। संदल, कासमी, संतरा, नीबू, क्लोरोफार्म, हाइड्रोजन, अल्युमिनिय, नीलम आदि में नीले रंग की किरणों के तत्व समाए होने के साथ-साथ ही चुम्बकीय शक्ति भी विद्यमान हैं।
1. सूर्य चार्ज नीली बोतल का पानी सारे शरीर को ठण्डक देने वाला होता है।
2. शरीर की अग्नि को कम करता है। तेज बुखार को कम करता है। ज्वर में ज्यादा प्यास लगने को संतुलित करता है। प्यास बुझाता है। चोट के कारण बहने वाले खून को बंद करता है।
3. सूर्य चार्ज किए नीले तेल को सिर में, तालू और कनपटी पर मालिश करने से सिर दर्द ठीक हो जाता है और बुखार भी कम हो जाता है।
4. दस्त तथा खूनी पेचिश में प्रयोग करने से यकीनन आराम आ जाता है।
5. गर्मी से शरीर पर दाने, चेहरे के कील-मुहासे, फोड़े-फुंसी आदि होने पर सूर्य चार्ज नारियल के नीले तेल से ठीक हो जाते हैं और अच्छा लाभ होता है।
6. मच्छर, बिच्छू तथा ततैया आदि के काटने पर सूर्य चार्ज नीला तेल लगाने से तुरन्त फायदा होता है।
7. सूर्य किरण और रंग चिकित्सा से तैयार नारियल के नीले तेल को लगाने से तुरन्त लगाने से जल जाने की जगह पर तुरन्त आराम आ जाता है। फफोला भी नहीं पड़ता। नीला तेल लगाना बहुत लाभकारी है।
8. टांसिल बढ़ने पर सूर्य तप्त नीले पानी से गरारे करें और सूर्य चार्ज नीली ग्लिसरीन का गले में लेप करने से लाभ मिलता है।
9. दांत दर्द, मसूड़ों की सूजन, दांतों में भोजन या पानी गर्म-सर्द लगना तथा मुंह में छालों के पड़ने पर सूर्य तप्त नीले पानी से गरारे करें और सूर्य चार्ज नीली ग्लिसरीन का मुंह में लेप करने से तुरन्त आराम मिलता है।
10. बच्चों का काग लटकने (घिन्डी) पर सूर्य चार्ज ग्लिसरीन मुंह में लगाने से कुछ ही दिन में आराम आ जाता है।
11. कील-मुहासे, फोड़े-फुंसियां और सूजन हो जाने पर सूर्य चार्ज नीला तेल लगाने से लाभ मिलता है।
12. कान में दर्द होने पर सूर्य चार्ज नारियल का तेल हल्का गर्म करके कान में डाला जाए तो तुरन्त आराम आ जाता है।
13. तेज बुखार में अर्थात एक सौ एक डिग्री से ज्यादा अगर बुखार हो जाए तो सिर में, तालू पर सूर्य चार्ज नारियल के नीले तेल की धीर-धीरे मालिश करने से और पीने के लिए सूर्य तप्त नीला पानी देने से रोगी को लाभ होता है। लेकिन अगर एक सौ एक डिग्री से कम बुखार हो तो नीला पानी बंद कर दें और सूर्य तप्त हरा पानी देने से लाभ होता है।
14. स्नायु तंत्र (नर्वस सिस्टम) के उत्तेजित होने पर सूर्य चार्ज नारियल के नीले तेल की सिर पर, तालू में हाथ की अगली पोरों से धीरे-धीरे मालिश करने से शांति मिलती है।
15. बवासीर के मस्सों या अर्श पर सूर्य चार्ज नारियल का नीला तेल कुछ दिन लगाने से बहुत लाभ होता है।
16. बच्चों के दांत निकलने पर सूर्य चार्ज नारियल के नीले तेल की तालू पर तीन-चार बूँदें डाल कर हाथ की अगली पोरों से मालिश करने से बच्चों के दांत आसानी से निकल आते हैं।
17. दिमागी काम करने वालों के लिए सूर्य चार्ज नारियल के नीले तेल की तालू पर हाथ की अगली पोरों से धीरे-धीरे दस-पन्द्रह मिनट मालिश करें। यह दिमाग के लिए बहुत अच्छी औषधि है।
18. तेज ज्वर में सूर्य चार्ज नारियल के नीले तेल की सिर पर मालिश करने से तेज ज्वर में फायदा होता है।
19. सूखी खुजली, दाद-खाज आदि पर सूर्य चार्ज नारियल का नीला तेल लगाने से ठण्डक और शांति मिलती है।
20. सूर्य चार्ज नीले तेल से तैयार की हुई दवाई सब प्रकार की ठण्डक देने वाली दवाइयों से सर्वश्रेष्ठ होता है।
21. जो लोग नींद की गोली खाकर नींद लेते हैं वे अब सूर्य चार्ज नारियल का नीला तेल सिर में तालू पर लगाकर हाथ की अगली पोरों से धीरे-धीरे मालिश करने से गहरी व मीठी नींद का आनन्द ले सकते हैं।


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